संवाद न्यूज एजेंसी
साढौरा। सकट चौथ का व्रत प्रथम पूज्य देवता भगवान गणेश को समर्पित है। इस दिन व्रत रखा जाता है और गणेश जी की पूजा की जाती है। इसके बाद रात में चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत का पारण किया जाता है। यह व्रत खासतौर पर महिलाओं द्वारा अपनी संतान की लंबी आयु और सुखी जीवन के लिए रखा जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार प्रत्येक वर्ष माघ माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि पर सकट चौथ का व्रत रखा जाता है। ज्योतिषाचार्य डॉ. रामराज कौशिक के अनुसार इस बार यह व्रत 29 जनवरी को होगा। इस व्रत को सकट चौथ के अलावा संकष्टी चतुर्थी, तिलकुट, माघ चतुर्थी आदि नामों से जाना जाता है। मान्यता है कि इस व्रत को करने से विघ्नहर्ता गणेश संतान के सारे संकटों को दूर करते हैं।
सकट चौथ मुहूर्त
पंचांग के अनुसार माघ माह के कृष्ण पक्ष की सकट चतुर्थी तिथि की शुरुआत 29 जनवरी को सुबह 06 बजकर 10 मिनट होगी। अगले दिन इसका समापन 30 जनवरी को सुबह 08 बजकर 54 मिनट पर होगा। ऐसे में इस साल सकट चौथ का व्रत 29 जनवरी को रखा जाएगा। इस दिन शुभ मुहूर्त में गणेश पूजन करने से अति उत्तम फल प्राप्त होगा।
अमृत (सर्वोत्तम)- सुबह 07 बजकर 11 मिनट से सुबह 08 बजकर 32 मिनट तक
शुभ (उत्तम) - सुबह 09 बजकर 43 मिनट से सुबह 11 बजकर 14 मिनट से तक
शाम का मुहूर्त - शाम 04 बजकर 37 मिनट से शाम 07 बजकर 37 मिनट तक
सकट चौथ चंद्रोदय समय
माघ माह की सकट चतुर्थी के दिन 29 जनवरी को चंद्रोदय रात 09 बजकर 10 मिनट पर होगा।
सकट चौथ की पूजा विधि
सकट चौथ के दिन ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद भगवान गणेश की प्रतिमा को चौकी पर स्थापित करें। गणेश जी के साथ मां लक्ष्मी की मूर्ति भी रखें। गणेश जी और मां लक्ष्मी को रोली और अक्षत लगाएं। फिर पुष्प, दूर्वा, मोदक आदि अर्पित करें। सकट चौथ में तिल का विशेष महत्व है। इसलिए भगवान गणेश को तिल के लड्डुओं का भोग लगाएं। ओम गं गणपतये नमः मंत्र का जाप करें। अंत में सकट चौथ व्रत की कथा सुनने और आरती करें। रात्रि में चंद्रमा को अर्घ्य देकर सकट चौथ व्रत संपन्न करें।