संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। एसएस जैन सभा मॉडल टाउन के प्रांगण में चल रहे चातुर्मास के 18वें दिन सत्संग में साध्वी सुचेता महाराज ने धर्म की परिपूर्ण व्याख्या की। उन्होंने कहा कि धर्म एक व्यापक अवधारणा है, जो जीवन के नैतिक, आध्यात्मिक व सामाजिक पहलुओं को समाहित करती है।
साध्वी सुचेता महाराज ने कहा कि धर्म को ब्रह्मांड की व्यवस्था या नियम के रूप में भी देखा जा सकता है, जिसका पालन कर मनुष्य सुखमय जीवन जी सकता है। यह एक ऐसा आचरण है, जो मनुष्य को नैतिकता व आध्यात्मिक अनुशासन का पालन करने में मदद करता है। इससे उसे जीवन जीने का मार्गदर्शन मिलता है।
उन्होंने कहा कि धर्म मनुष्य को आत्म ज्ञान, आत्म नियंत्रण व आत्म सुधार की ओर ले जाता है, जिससे उसका व्यक्तिगत विकास होता है। कुछ धर्मों में धर्म को अंतिम सत्य या मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग माना जाता है। संक्षेप में धर्म बहुआयामी अवधारणा है, जो व्यक्ति व समाज को विभिन्न तरीकों से प्रभावित करती है।
उन्होंने बताया कि यह मार्गदर्शक सिद्धांत है, जो मनुष्य को जीवन के अर्थ व उद्देश्य को समझने में मदद करता है। साध्वी समीक्षा महाराज ने दया का वर्णन करते हुए बताया कि दया का भाव क्या है। गौतम ऋषि ने मनुष्य के लिए आवश्यक संस्कारों का निर्देश देते हुए आठ आत्मगुणों पर बल दिया है।