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संस्कार बनते हैं आचरण की नींव : साध्वी रबिया

Mon, 16 Feb 2026 01:06 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
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दिव्य ज्योति जागृति संस्थान आश्रम में सत्संग सुनती संगत। आयोजक - फोटो : संवाद
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संवाद न्यूज एजेंसी
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व्यासपुर। दिव्य ज्योति जागृति संस्थान आश्रम में रविवार को आयोजित साप्ताहिक सत्संग में साध्वी रबिया भारती ने आचरण के महत्व पर प्रकाश डाला। प्रवचन में उन्होंने कहा कि मनुष्य के आचार, विचार और व्यवहार का समन्वय ही उसका वास्तविक आचरण होता है।
उन्होंने बताया कि मानसिक धारणाएं और संस्कार ही आचरण की नींव बनते हैं और जिस संगति व वातावरण में व्यक्ति अधिक समय बिताता है, उसका व्यक्तित्व उसी के अनुरूप ढलता चला जाता है।हमारे जीवन का जो हिस्सा बाहरी दुनिया को दिखाई देता है, वह केवल एक स्क्रीन की तरह है, जबकि वास्तविकता उन विचारों और मानसिकता में छिपी होती है जो तब प्रकट होती है जब हम पर किसी की नजर नहीं होती।
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उन्होंने कहा कि ज्ञानेंद्रियों से जो हम निरंतर ग्रहण करते हैं, वही कर्मेंद्रियों के माध्यम से कर्म बनकर बाहर दिखाई देता है। उन्होंने बताया कि इतिहास में कई ऐसे उदाहरण मिलते हैं, जिनका जन्म और वातावरण नकारात्मक था, लेकिन संतों के संग ने उनके जीवन की दिशा बदल दी। अंगुलिमाल डाकू का उदाहरण देते हुए कहा कि महात्मा बुद्ध के क्षणभर के संग ने ही उसके जीवन को बदल दिया और वह सदाचार के मार्ग पर अग्रसर हो गया।
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साध्वी ने कहा कि संतों का संग किसी भी व्यक्ति को अधम से उत्तम बनाने की क्षमता रखता है। आज समाज को ऐसे संतों की आवश्यकता है, जो ब्रह्मज्ञान और ध्यान साधना के माध्यम से मनुष्य के भीतर की नकारात्मकता को समाप्त कर उसे आत्मबोध की ओर प्रेरित करें।
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