यमुनानगर। रोडवेज की वर्कशॉप में मरम्मत कार्य केवल दो नियमित मैकेनिकों के भरोसे चल रहा है। मैकेनिकों की कमी के कारण बसों की मरम्मत में देरी हो रही है, जिसका असर बसों के रखरखाव और संचालन पर भी पड़ने लगा है।
रोडवेज के कर्मचारी नेता मनिंदर के अनुसार वर्कशॉप में करीब 60 हेल्पर कार्यरत हैं, लेकिन नियमित मैकेनिक केवल दो ही बचे हैं। ऐसे में अधिकांश तकनीकी कार्य हेल्परों की मदद से कराए जा रहे हैं। कर्मचारियों का कहना है कि हेल्पर अनुभव के आधार पर काम संभाल रहे हैं। प्रशिक्षित मैकेनिकों की कमी के कारण कई बार मरम्मत कार्य अपेक्षा से अधिक समय ले लेता है।
कर्मचारियों के मुताबिक वर्ष 1993 के बाद से रोडवेज विभाग में मैकेनिकों की नई भर्ती नहीं हुई। इसके बाद समय-समय पर सेवानिवृत्ति के कारण मैकेनिकों की संख्या लगातार घटती गई, लेकिन रिक्त पदों को नहीं भरा गया। वर्कशॉप कर्मचारियों का कहना है कि बसों की संख्या और तकनीकी जरूरतों के हिसाब से पर्याप्त मैकेनिक उपलब्ध नहीं हैं।
कई बार एक साथ कई बसों की मरम्मत का काम आने पर दिक्कत बढ़ जाती है, जिससे बसों को दोबारा सेवा में भेजने में देरी होती है। इसका असर यात्रियों को मिलने वाली सुविधाओं पर भी पड़ सकता है। कर्मचारियों ने विभाग से लंबे समय से खाली पड़े मैकेनिकों के पदों पर भर्ती करने की मांग उठाई है। उनका कहना है कि यदि जल्द नई नियुक्तियां नहीं की गईं तो भविष्य में वर्कशॉप का कामकाज और अधिक प्रभावित हो सकता है।
यमुनानगर रोडवेज वर्कशॉप में वर्ष 2008 में भर्ती किए गए हेल्पर आज तकनीकी कार्यों की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। कर्मचारियों के अनुसार मैकेनिकों की लंबे समय से भर्ती नहीं होने के कारण अधिकांश मरम्मत कार्य इन्हीं हेल्परों के सहारे किया जा रहा है। अनुभव के आधार पर वे बसों की मरम्मत और रखरखाव में सहयोग दे रहे हैं, लेकिन प्रशिक्षित मैकेनिकों की कमी के कारण कार्य प्रभावित हो रहा है। कर्मचारियों ने रिक्त पदों पर जल्द भर्ती की मांग की है। संवाद
वर्कशॉप में मैकेनिकों की कमी का मामला मुख्यालय के संज्ञान में लाया जा चुका है। इसके लिए विभाग को पत्र भेजकर आवश्यक संख्या में मैकेनिकों की नियुक्ति की मांग की गई है। - संजय रावल, जीएम रोडवेज।