संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। मानसून में बारिश होते ही डेंगू व मलेरिया के केस मिलने शुरू हो गए हैं। अब खाली प्लॉटों व गड्ढों में पानी भरने से पनप रहे मच्छरों को मारने के लिए जिला मलेरिया विभाग को काला तेल नहीं मिल रहा है। मलेरिया विभाग के अधिकारियों ने रोडवेज से दो ड्रम काला तेल मांगा था। रोडवेज के अधिकारी काला तेल देने से पहले नकद रुपये मांग रहे हैं।
गड्ढों व खाली प्लॉटों में बारिश का पानी हर साल भर जाता है। जिसमें डेंगू मच्छर का लारवा पनपने लगता है। थोड़े दिन बादमच्छर लोगों को काट कर बीमारियां फैलाता है। इस पर प्लॉटों व गड्ढों में जमा पानी में काला तेल डालना पड़ता है। तेल रालते ही पानी के ऊपर एक परत बिछ जाती है जिसमें मच्छर बैठ नहीं पाता। यदि बैठ भी जाए तो तेल की चिकनाहट में मच्छर चिपक कर मर जाता है।
इसके लिए मलेरिया विभाग हर साल रोडवेज से काला तेल अपनी जरूरत के हिसाब से लेता है। तेल लेने के लिए विभाग की तरफ से कर्मचारी रोडवेज की वर्कशॉप में भेजे गए थे। वहां से जवाब मिला कि तेल बाद में मिलेगा पहले नकद भुगतान। इसके बाद दोबारा संपर्क किया गया, इस बार फिर से वही जवाब मिला।
गड्ढों व तालाबों में अब तक मलेरिया विभाग की तरफ से काले तेल का छिड़काव किया जाता था। इस बार इसमें थोड़ा बदलाव किया गया है। अबकी बार मिट्टी में काला तेल मिलाकर इसके गोले बनाए जा रहे हैं। फिर इन गोलों को तालाब में दूर तक फेंक दिया जाता है। पानी के संपर्क में आने से मिट्टी थोड़ी देर में ही तालाब की तलहटी में बैठ जाती है, जबकि काला तेल पानी में मिल जाता है। इस तरह तेल सारे तालाब में फैल जाता है।
हम नकद भुगतान नहीं कर सकते : डॉ. सुशीला
जिला मलेरिया अधिकारी डॉ. सुशीला सैनी ने बताया कि हरियाणा रोडवेज से दो ड्रम काला तेल मांगा गया था। वह पहले नकद रुपये मांग रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग नगद भुगतान नहीं कर सकता। दोबारा कर्मचारियों को भेजा जाएगा। इस वक्त काले तेल की बहुत जरूरत है, क्योंकि बारिश का पानी खाली जगहों पर भर रहा है।
वर्कशॉप मैनेजर से बात करुंगा : महाप्रबंधक
रोडवेज महाप्रबंधक संजय रावल ने बताया कि रोडवेज हर साल मलेरिया विभाग को काला तेल उपलब्ध करवाता है। जो पेमेंट ली जाती है उसकी बाकायदा रसीद भी काटी जाती है। मलेरिया विभाग को नगद भुगतान करने में कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए। फिर भी वह इस बारे में रोडवेज वर्कशॉप मैनेजर से बात करेंगे।