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Weather: बढ़ता तापमान गेहूं को पहुंचा सकता है नुकसान, बढ़े अधिकतम तापमान ने किसानों की नींद उड़ाई

Wed, 01 Mar 2023 02:05 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो राजेश कुमार, संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत (हरियाणा)

सार

गत वर्ष मार्च माह में अधिकतम तापमान 31 से 32 डिग्री तक पहुंच गया था। दरअसल तापमान बढ़ने से गेहूं का दाना पिचक जाता है। इससे न केवल गेहूं की गुणवत्ता पर असर पड़ता है बल्कि वजन भी कम हो जाता है।
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गेहूं की फसल। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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फरवरी माह के आखिरी सप्ताह में बढ़े अधिकतम तापमान ने किसानों की नींद उड़ा दी है। बढ़ता तापमान गेहूं की फसल के लिए ठीक नहीं बताया जा रहा है। अभी से ही अधिकतम तापमान 28 डिग्री से ऊपर जा चुका है। वहीं मौसम विभाग के अनुसार, 14 मार्च तक तापमान 34 डिग्री तक जा सकता है। ऐसे में हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय हिसार ने किसानों के लिए एडवाइजरी जारी की है, जिसमें किसानों को गेहूं की फसल की हल्की सिंचाई करने व निगरानी रखने की सलाह दी है।
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किसानों के लिए राहत की बात यह है मौसम विभाग ने एक से दो मार्च तक आसमान में बादल छाने, हवाएं चलने व हल्की बूंदाबांदी होने की संभावना जताई है। मंगलवार को भी आसमान में हल्के बादल छाए रहे, जिससे अधिकतम तापमान में कुछ कमी दर्ज की गई।

मंगलवार को अधिकतम तापमान 26 व न्यूनतम 16 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। कृषि विज्ञान केंद्र दामला के समन्वयक डॉ. संदीप रावल ने बताया कि मार्च में अधिकतम तापमान यदि 28 डिग्री के आसपास रहे तो अच्छा होगा।
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गत वर्ष मार्च माह में अधिकतम तापमान 31 से 32 डिग्री तक पहुंच गया था। दरअसल तापमान बढ़ने से गेहूं का दाना पिचक जाता है। इससे न केवल गेहूं की गुणवत्ता पर असर पड़ता है बल्कि वजन भी कम हो जाता है। यही वजह रही कि गत वर्ष तापमान बढ़ने से गेहूं की पैदावार में 10 से 15 प्रतिशत कमी दर्ज की गई थी। संवाद

एडवाइजरी जारी की है : राकेश पोरिया
कृषि उपमंडल अधिकारी डॉ. राकेश कुमार पोरिया ने बताया कि बढ़ते तापमान को देखते हुए हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय हिसार ने एडवाइजरी जारी की है, जिसमें बढ़ते तापमान से गेहूं की फसल को बचाने की सलाह किसानों को दी गई है। दिन का तापमान 30 से 32 डिग्री सेल्सियस व रात का तापमान 15 डिग्री सेल्सियस से नीचे रहता है, तब तक किसानों को घबराने की जरूरत नहीं है। रात व दिन का तापमान मिलाकर औसत 22 डिग्री सेल्सियस गेहूं की पैदावार के लिए सबसे उत्तम है। औसत तापमान 24 डिग्री सेल्सियस तक फसल सहन कर सकती है, पर दिन का तापमान 35 डिग्री सेल्सियस से ऊपर होने पर गेहूं के बनने वाले दानों पर बुरा प्रभाव पड़ता है।

यह सावधानी बरतें किसान
  •  बढ़े हुए उच्च तापमान से बचने के लिए किसानों को आवश्यकता अनुसार हल्की सिंचाई करने की सलाह दी गई है। जब तेज हवा चल रही हो तो सिंचाई रोक दें, अन्यथा फसल के गिरने से नुकसान हो सकता है।
  •  जिन किसानों के पास फव्वारा सिंचाई की सुविधा है, वह दोपहर को तापमान वृद्धि के समय आधा घंटा फव्वारे से सिंचाई कर सकते हैं।
  •  गेहूं में बालियां निकलते समय या अगेती गेहूं की बालियां निकली हुई है, तो भी 0.2 प्रतिशत पोटेशियम क्लोराइड पानी की 400 ग्राम म्यूरेट ऑफ पोटाश (पोटाश खाद) 200 लीटर पानी में घोलकर प्रति एकड़ छिड़काव करने से तापमान में अचानक हुई वृद्धि से होने वाले नुकसान को कम किया जा सकता है।
  •  पछेती बीजी गई गेहूं में पोटाशियम क्लोराइड का छिड़काव 15 दिनों के अंतराल पर दो बार किया जा सकता है।
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