फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Yamuna Nagar News: राइस मिलरों का एलान, बकाया 500 करोड़ रुपये मिलने पर ही करेंगे उठान

Mon, 14 Sep 2026 01:27 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
विज्ञापन
जगाधरी में बैठक के दौरान हाथ उठाकर एकजुटता का परिचय देते राइस मिलर। संवाद
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
विज्ञापन

यमुनानगर। धान की फसल खेतों में पककर तैयार होने लगी है और जल्द ही कटाई शुरू होने वाली है। सरकारी खरीद शुरू होने से ठीक पहले जिले के राइस मिलरों ने सरकार के सामने अपनी मांगें रख दी हैं। पिछली मिलिंग का भुगतान नहीं होने तक राइस मिलरों ने अनाज मंडियों से धान उठान न करने का फैसला लिया है।
राइस मिलरों की बैठक जगाधरी स्थित एक निजी पैलेस में हुई। बैठक में जिलेभर के राइस मिलर शामिल हुए और अपनी समस्याओं पर चर्चा की। एसोसिएशन के अनुसार यमुनानगर का करीब 500 करोड़ रुपये सरकार की तरफ बकाया है। इसमें दो साल का बोनस भी शामिल है। हर साल अगस्त माह तक मिलर धान की कुटाई के लिए एग्रीमेंट कर लेते थे। इस बार सितंबर का आधा महीना बीत चुका है और अभी तक स्थिति स्पष्ट नहीं है।
विज्ञापन

वहीं एक अक्तूबर से सरकारी स्तर पर धान की खरीद शुरू होने की उम्मीद है। जिले में करीब 185 राइस मिल हैं। हर साल राइस मिलर सरकार के साथ एग्रीमेंट कर अनाज मंडियों से धान उठाते हैं।
इसके बाद धान की कुटाई कर सरकार को निर्धारित मात्रा में चावल वापस किया जाता है। सरकार की शर्तों के अनुसार एक क्विंटल धान के बदले राइस मिलर को 67 किलोग्राम चावल लौटाना होता है। राइस मिलर एसोसिएशन यमुनानगर के प्रधान मनीष बंसल, प्रवीण बटार, अजय अग्रवाल, मनीष कांबोज, पीयूष गर्ग, नरेश राणा, शशि भूषण, अरविंद अग्रवाल का कहना है कि मिलरों को आज भी प्रति क्विंटल केवल 10 रुपये मिलिंग चार्ज दिया जा रहा है।
यह दर करीब 40 साल पुरानी है, जबकि इस अवधि में मजदूरी, बिजली, रखरखाव और अन्य खर्च कई गुना बढ़ चुके हैं। सरकार पहले पिछले साल का चावल राइस मिलरों से उठाए।
पोर्टल पर रोजाना एक राइस मिलर को एफसीआई को केवल एक गाड़ी चावल देने की अनुमति है। ऐसे में जिन मिलरों पर अधिक मात्रा में चावल बकाया है, वे सरकार की ओर से निर्धारित 30 सितंबर तक भी पूरा चावल जमा नहीं करा पाएंगे। जिले की करीब 1800 गाड़ी चावल बकाया है। गत दो दिनों में इसमें से केवल 150 गाड़ी चावल ही डिलीवरी हो पाई है।
मंडियों में बढ़ सकती है किसानों की दिक्कत
राइस मिलरों की मांगों का जल्द समाधान नहीं हुआ तो अनाज मंडियों में किसानों की परेशानी बढ़ सकती है। धान की सरकारी खरीद शुरू होने के बाद मंडियों में पहुंचने वाली फसल का समय पर उठान जरूरी है। धान में नमी की मात्रा अधिक होने पर उसे सुखाने की जरूरत भी पड़ती है। ऐसे में उठान प्रभावित हुआ तो मंडियों में धान की बोरियों के ढेर लग सकते हैं। भारतीय किसान यूनियन चढूनी के जिलाध्यक्ष संजू गुंदियाना और भाकियू रतनमान के जिलाध्यक्ष सुभाष गुर्जर ने कहा कि सरकार को राइस मिलरों की समस्या का जल्द समाधान निकालना चाहिए।
विज्ञापन

सरकार स्तर पर राइस मिलरों से बातचीत चल रही है। जिन राइस मिलरों का पिछला चावल बकाया है, उसे डिलीवर करने के लिए 30 सितंबर तक का समय दिया गया है। -नितिश सिंगला, डीएफएससी, यमुनानगर।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें