फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Yamuna Nagar News: राइस मिलर्स का नहीं हुआ एग्रीमेंट, बिना उठान धान से अट जाएंगी मंडियां

Sat, 28 Sep 2024 04:50 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
विज्ञापन
विज्ञापन
राजेश कुमार
विज्ञापन

यमुनानगर।
धान की सरकारी खरीद शुक्रवार से शुरू होने से किसानों को बड़ी राहत मिली है। जबकि राइस मिलरों का अभी तक सरकार के साथ एग्रीमेंट न होना अनाज मंडियों में किसानों के लिए बड़ी मुसीबत खड़ी कर सकता है। शुक्रवार तक एक भी राइस मिलर ने एग्रीमेंट नहीं किया। सरकार की ओर से नई पॉलिसी में लगाई गई शर्तों का राइस मिलर विरोध कर रहे हैं। ऐसे में मिलरों का एग्रीमेंट होगा या नहीं अथवा कब तक होगा फिलहाल इस पर कोई सहमति नहीं बनी हैं। जब तक एग्रीमेंट नहीं होगा तब तक अनाज मंडियों में खरीदी गई धान का उठान नहीं हो पाएगा। जिसका सीधा असर किसानों पर पड़ेगा। राइस मिलर्स अपनी मांगों को लेकर खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के एसीएस से लेकर तमाम नेताओं से मिल चुके हैं, फिर भी अभी तक इस बारे में कोई सहमति नहीं बन पाई है।
जानकारी के अनुसार यमुनानगर में कुल 184 राइस मिल हैं। सरकार की ओर से प्रत्येक राइस मिलर्स को हर साल कुटाई के लिए धान दिया जाता है। सरकार यदि एक क्विंटल धान देती है तो राइस मिलर्स को 67 किलोग्राम चावल सरकारी गोदामों में डिलीवर करना होता हैं। इससे पहले प्रत्येक राइस मिलर्स को सरकार के साथ एग्रीमेंट करना होता है। जिसमें मिलर को बताना होता है कि उनकी राइस मिल पूरी तरह से खाली और चालू हालत में है। मिल का बिजली बिल और जीएसटी बकाया नहीं है। इसके अलावा कई अन्य शर्तें भी इसमें होती हैं। राइस मिल की जितनी मिलिंग कैपेसिटी होती है उसके हिसाब से सरकार उन्हें धान उपलब्ध कराती है। हर साल 15 अगस्त से एग्रीमेंट का कार्य शुरू हो जाता है।
विज्ञापन

डिस्ट्रिक राइस मिलर्स एसोसिएशन यमुनानगर के जिलाध्यक्ष मनीश बंसल, वरदान राइस मिल के संचालक मनीष कांबोज, जगदंबा राइस मिल के अरविंद अग्रवाल, त्रिदेव राइस मिल के प्रवीण अग्रवाल, भवानी राइस मिल के गौरव शर्मा, गुरु कृपा राइस मिल के नरेश राणा का कहना है कि पानी की बचत हो सके इसके लिए अब धान की हाइब्रिड वैरायटी बाजार में आ चुकी हैं। यह फसल जल्दी तैयार हो जाती है। परंतु इसमें प्रति क्विंटल धान में से औसतन 60 से 62 किलोग्राम चावल ही निकलता है। जबकि सरकार 67 किलोग्राम ले रही है। राइस मिलर्स यहां तक कह चुके हैं कि यदि सरकार काे कोई शक है तो वह मंडी से धान लेकर उसकी कुटाई करवा कर सैंपल ले सकती है। दूसरा जिले में करीब 15 सरकारी गोदाम हैं उनमें किसी में भी चावल लगाने की जगह नहीं है। अब धान की जो कुटाई होगी उसका चावल कहां लगाया जाए यह स्पष्ट नहीं है। हाइब्रिड में टुकड़े (टूटे हुए चावल) की मात्रा बढ़ाई जाए। सरकार की शर्त है कि जो चावल मिलर डिलीवर करेगा उसमें टुकड़े की मात्रा 25 प्रतिशत से अधिक नहीं होनी चाहिए। जबकि कुटाई करने पर 35 से 40 प्रतिशत टुकड़ा निकलता है। साथ ही सरकार की तरफ से 10 रुपये प्रति क्विंटल मीलिंग चार्ज दिए जाते हैं। इसे बढ़ाकर छतीसगढ़ की तर्ज पर 120 रुपये करने की मांग हो रही है। इस बारे में जिला एवं खाद्य आपूर्ति नियंत्रक जीतेश गोयल का कहना है कि फिलहाल किसी भी राइस मिलर्स का सरकार के साथ एग्रीमेंट नहीं हुआ है। एग्रीमेंट को लेकर मुख्यालय स्तर पर बातचीत चल रही है। उम्मीद है जल्द ही इसका कोई समाधान निकल जाएगा। संवाद
विज्ञापन


किसानों को इस तरह से होगी परेशानी
सरकार से एग्रीमेंट होने के बाद राइस मिलर्स खरीद शुरू होने के दिन से ही अनाज मंडियों से धान का उठान शुरू कर देते हैं। परंतु बिना एग्रीमेंट धान का उठान नहीं होगा। खेत में कटाई के वक्त धान में बहुत ज्यादा नमी होती है। नमी को कम करने के लिए धान को मंडियों के यार्ड व सड़कों पर सुखाना पड़ता है। उठान न होने से किसानों को मंडियों में अपनी धान सुखाने के लिए जगह नहीं मिलेगी। वहीं उठान न होने से मंडियां धान की बोरियों से अट जाएंगी।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें