संवाद न्यूज एजेंसी
साढौरा। सरकारी धान की खरीद एक अक्तूबर से शुरू हो रहा है, लेकिन खाद्य निगम गोदामों में इस समय धान का चावल रखने के लिए कोई पर्याप्त जगह उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे में राइस मिलर्स सरकारी धान लेकर कुटाई कर चावल सरकार को देने के विरोध में हैं। किसी भी राइस मिलर्स ने ना तो एजेंसी के साथ एग्रीमेंट किया है और न ही सीएमआर के लिए रजिस्ट्रेशन कराया है।
राइस मिलर्स धान पॉलिसी के नियमों में बदलाव की मांग कर रहे हैं। इस बारे में सोमवार को राइस मिलर्स एसोसिएशन व आढ़ती संघ एसोसिएशन द्वारा अपनी मांगों व समस्याओं को लेकर अनाज मंडी में बैठक का आयोजन किया। इस बैठक में राइस मिलर्स व आढ़तियों ने सर्वसम्मति से फैसला लिया कि जब तक सरकार उनकी मांगों को पूरा नहीं करती तब तक अनाज मंडी व राइस मिलों में धान की फसल को सुखाने, तुलाई व भराई का कार्य बंद रखेंगे।
आढ़तियों का कहना है कि इस बार तो यह भी नहीं पता कि बारदाना सरकार या मिलर्स देंगे। इस बार सामान्य धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2300 रुपये प्रति क्विंटल व ग्रेड-ए धान का समर्थन मूल्य 2320 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित हुआ है। राइस मिलर्स का कहना है कि जब तक मांगें नहीं मानी जाती, तब तक वह सीएमआर के लिए रजिस्ट्रेशन नहीं कराएंगे। बैठक में एफसीएस एंड सीए विभाग द्वारा जारी की गई पॉलिसी 2024-25 पर चर्चा हुई।
प्रधान अरविंद अग्रवाल व प्रदीप वर्मा ने बताया कि उत्तरी हरियाणा के राइस मिलर्स जो कि पिछले 20 वर्षों से सीएमआर का कार्य कर रहे हैं, आज बहुत ही मुश्किल दौर से गुजर रहे हैं। सरकार द्वारा जारी की गई नई पालिसी बिल्कुल भी राइस मिलर्स के हक में नहीं है। राइस मिलर्स पिछले दो-तीन महीने से संबंधित विभागों को अपनी मांगों के बारे में बता रहे हैं। जिसका कोई संज्ञान अभी तक नहीं लिया गया है।
सरकार द्वारा जारी नई पालिसी तो राइस मिलर्स इंडस्ट्री को खत्म करने की मंशा से बनाई गई है। नई पालिसी के मुताबिक राइस मिलर्स के एग्रीमेंट करने के बाद भी सरकार कभी भी एग्रीमेंट की तय शर्तों को बदल सकती है। सरकार की इस तरह की शर्तें राइस मिलर्स बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करेगा। इस मौके पर कुलदीप अग्रवाल, इकबाल सिंह भाटिया, मुनीष गर्ग, प्रवीण अग्रवाल, पवन जिंदल, रमेश सैनी, सुकेश गुलाटी, दर्शन लाल, दिव्य जैन, गगन गोयल, धर्मबीर सिंह आदि उपस्थित रहे।