जगाधरी। दिल्ली में चल रही सेना की अग्निवीर भर्ती के लिए अभ्यर्थियों से धर्म संबंधी प्रमाणपत्र मांगा जा रहा है।
इस प्रमाणपत्र को बनवाने के लिए अभ्यर्थी एसडीएम व तहसीलदार कार्यालयों में भटक रहे हैं, क्योंकि इन प्रमाणपत्रों को एसडीएम अथवा तहसीलदार को ही सत्यापित करना है।
इससे पूर्व इन प्रमाणपत्रों पर अपने-अपने क्षेत्र पार्षदों व अन्य जन प्रतिनिधियों की ओर से तस्दीक करना अनिवार्य किया गया है। लिहाजा यह अभ्यर्थी जनप्रतिनिधियों के भी चक्कर काट रहे हैं। प्रमाणपत्र के जरिये इस बात की तस्दीक की जा रही है कि अभ्यर्थी किस धर्म में मान्यता रखता है। इस दाैरान कई अभ्यर्थियों को समस्या यह आ रही है कि कुछ पार्षद ऐसा पत्र सत्यापित करने से मना कर रहे हैं।
पार्षदों का कहना है कि धार्मिक मान्यताओं का सत्यापन कोई नहीं कर सकता है। चूंकि कोई व्यक्ति किस धर्म का अनुपालन करता है, इसकी जानकारी पार्षद को नहीं हो सकती है। यह व्यक्ति का निजी अधिकार है और इसके बारे किसी को जानकारी होना जरूरी नहीं है। वहीं, इसे लेकर अभ्यर्थी भी परेशान हो रहे हैं। एक अभ्यर्थी ने बताया कि तहसीलदार और एसडीएम भी तब तक प्रमाणपत्र सत्यापित नहीं करेंगे, जब तक स्थानीय जनप्रतिनिधि तस्दीक नहीं करेगा। अभ्यर्थियों का कहना है कि इसके वे अधिकारियों व पार्षद के चक्कर लगा रहे हैं।
वार्ड नंबर 13, वार्ड नंबर सात, चार और अन्य पार्षदों ने बताया कि इन दिनों उनके पास युवा एक फाॅर्म लेकर पहुंच रहे हैं। यह फार्म भर्ती सेना में संबंधी बताया जा रहा है। जिसमें व्यक्ति की धार्मिक मान्यताओं संबंधी तस्दीक की जानी है। निवर्तमान पार्षद निर्मल चौहान, रामआसरा, विनय कांबोज ने बताया कि उनके पास क्षेत्र के युवा सेना की अग्निवीर भर्ती के लिए एक फाॅर्म लेकर पहुंच रहे हैं। इस फाॅर्म में धार्मिक मान्यताओं के बारे जानकारी मांगी गई है। पत्र तहसीलदार या एसडीएम द्वारा सत्यापित किया जाना है परंतु अधिकारी उन्हें पहले जनप्रतिनिधियों के पास तस्दीक करवाने भेज रहे हैं।
निर्मल चौहान ने कहा कि उनके पति बीएसएफ में हैं परंतु उनकी धार्मिक मान्यताओं संबंधी कोई प्रमाणपत्र नहीं लिया गया। 10 साल के कार्यकाल में उन्होंने किसी सरकारी भर्ती के लिए ऐसे पत्र का सत्यापन नहीं किया है। उन्होंने कहा कि कोई व्यक्ति किस धर्म का अनुयायी है यह उनका निजी मामला है। उनके अनुसार यह पत्र तहसीलदार व एसडीएम के नाम है परंतु प्रमाणपत्रों को सत्यापित करने के बजाय अभ्यर्थियों को पार्षदों के पास भेजा जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस तरह का प्रमाणपत्र लेना गलत है और यदि लिया जा रहा है तो एसडीएम व तहसीलदार ही इन्हें सत्यापित करें।
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