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एयरफोर्स से वीआरएस लेकर ठुकराई 35 लाख की नौकरी और बनी स्ट्रे डॉग्स का सहारा

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यमुनानगर। एयरफोर्स में नौकरी के दौरान स्वीटी नाम की डॉग की लाचारी व बीमारी ने स्क्वाड्रन लीडर रही सेक्टर-17 की नेहा गुप्ता के जीवन का लक्ष्य बदल दिया। स्वीटी का सहारा बनने के लिए नेहा ने पहले एयरफोर्स से वीआरएस लिया। इसके बाद उन्हें 35 लाख रुपये सालाना पैकेज की नौकरी का ऑफर मिला, उसे भी ठुकरा दिया। इसके बाद पांच वर्षों से नेहा सुबह-शाम स्ट्रे डॉग्स (आवारा कुत्ते) को खाना खिला रही हैं।
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वर्ष-2017 में 10-15 से शुरू हुई यह सेवा डेढ़ हजार कुत्तों तक पहुंच गई है, जिन्हें खाना खिलाने के साथ ही समय-समय पर वैक्सीन, इलाज व नसबंदी भी करवा रही हैं। नेहा की मानें तो अभी तक वे 200 कुत्तों का इलाज व एक हजार को वैक्सीन तथा 500 की नसबंदी करवा चुकी हैं। नेहा बताती हैं कि जब एयरफोर्स में वे स्क्वाड्रन लीडर के पद पर तैनात थीं, तब पुणे में पोस्टिंग के दौरान जनवरी-2015 में एक खंभे से उन्हें स्ट्रे डॉग बंधी मिली। इस स्ट्रे डॉग को वहां से रेस्क्यू कर वे साथ ले गईं और उसका नाम स्वीटी रखा। जून-2015 में पुणे एयरफोर्स स्टेशन से पोस्टिंग शिलांग में हुई, जहां वे स्वीटी को भी साथ ले गईं। वहां स्वीटी को लंग्स की बीमारी हो गई। नेहा ने बताया कि चिकित्सकों ने उसे वैक्सीन देने से इंकार कर दिया, जिसके बाद उन्होंने स्वीटी का इलाज खुद किया। इसके लिए उसने वेटनरी की किताबों की भी मदद ली। नेहा के अनुसार स्वीटी की बीमारी और उसके प्रति चिकित्सकों के रवैये ने उसे पशु सेवा के लिए प्रेरित किया। इसके बाद उन्होंने एयरफोर्स से वीआरएस लेकर कुत्तों की सेवा को ही मिशन बना लिया और स्वीटी को लेकर वापस यमुनानगर आ गईं। यहां वह स्वीटी के साथ ही आवारा कुत्तों का भी सहारा बनीं। इस दौरान उन्हें 35 लाख रुपये सालाना पैकेज की नौकरी का भी आफर मिला, लेकिन स्वीकार नहीं किया। पिछले पांच साल से वह यमुनानगर में आवारा कुत्तों को न सिर्फ खाना खिला रहीं हैं, बल्कि उनका उपचार और टीकाकरण भी करा रहीं हैं।
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