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Yamuna Nagar News: कच्चे माल का संकट, प्लाईवुड इंडस्ट्री 16 तक बंद

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जिले की प्लाईवुड इंडस्ट्री वीरवार को चार दिनों के लिए 16 जुलाई तक बंद हो गई। लक्कड़ मंडी बंद होने से प्लाईवुड इंडस्ट्री में कुछ दिनों से कच्चे माल का संकट आ गया था, वहीं कांवड़ यात्रा भी चल रही है। इंडस्ट्री को चलाने के लिए फैक्टरी संचालकों को लकड़ी नहीं मिल रही। इसी के साथ ही इंडस्ट्री में प्लाई का उत्पादन बंद हो गया। बंद होने के कारण सभी प्लाईवुड फैक्टरियों के बाहर सन्नाटा पसरा रहा। न तो फैक्टरियों के बाहर सफेदा व पोपलर की लकड़ी के ढेर थे और न ही मजदूर। जिले में 300 से अधिक प्लाईवुड यूनिट के अलावा 400 से अधिक पिलिंग यूनिट व सॉ मिल हैं। फैक्टरियां भले ही 16 जुलाई तक बंद हैं, लेकिन इन्हें शुरू होने में एक सप्ताह का समय लग सकता है। क्योंकि भारी बारिश के चलते खेत से पोपलर व सफेदा की लकड़ी की कटाई नहीं हो पाएगी। प्लाईवुड फैक्टरियों में रोजाना करीब 7000 क्यूबिक मीटर प्लाई का उत्पादन होता है। यहां तैयार प्लाई को ट्रकों के माध्यम से विभिन्नि राज्यों में सप्लाई किया जाता है। जिले में बनी प्लाईवुड मजबूत व उत्तम क्वालिटी की होने के कारण इसकी देश के लगभग सभी हिस्सों में अच्छी मांग है। हालांकि कुछ समय से प्लाईवुड इंडस्ट्री घाटे के दौर से गुजर रही है। जिस कारण इंडस्ट्री अब आठ से 12 घंटे ही चल रही है। जबकि पहले 18 से 24 घंटे इंडस्ट्री चलती थी।
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सावन माह में महा शिवरात्रि पर विभिन्न जगहों से आने वाले शिव भक्त जिले से होकर हरिद्वार में कांवड़ व गंगा जल लेने जाते हैं। शिव भक्त पद यात्रा के साथ-साथ वाहनों में सफर करते हैं। जिले की मानकपुर व मंडौली में चल रही लक्कड़ मंडी में उत्तर प्रदेश, हरियाणा के अलावा पंजाब से पोपलर व सफेदा की 700 से 800 ट्रैक्टर-ट्रालियां रोजाना आती हैं। लकड़ी की ज्यादातर ट्रालियां ओवरलोड ही होती हैं। ऐसे में इनसे हर समय हादसा होने का खतरा रहता है। इसलिए कांवड़ियों की सुरक्षा को देखते हुए प्रशासन हर साल दोनों लक्कड़ मंडियों को महा शिवरात्रि तक बंद कर देता है। इस बार सात जुलाई को लक्कड़ मंडी बंद कर दी गई थी। इसलिए छह जुलाई तक खरीदी गई लकड़ी से प्लाईवुड फैक्टरियां अब तक चल रही थी। अब लकड़ी न रहने से फैक्टरियां भी बंद हो गई हैं।

प्लाईवुड इंडस्ट्री के बंद होने का सीधा असर मजदूरों पर भी पड़ा है। सरकारी रिकॉर्ड में प्लाईवुड इंडस्ट्री में काम करने वाले 50 हजार मजदूर पंजीकृत हैं। वहीं जो मजदूर रोजाना दिहाड़ी तौर पर फैक्टरियों में काम करते हैं उनकी संख्या 50 से 55 हजार है। ऐसे में इंडस्ट्री के बंद होने से मजदूरों को अस्थायी तौर पर काम भी मिलना बंद हो गया है। एक तरफ मानसून सीजन चल रहा है और काम भी नहीं है। ऐसे में मजदूरों के सामने घर का गुजारा चलाने का संकट खड़ा हो गया है। इंडस्ट्री में काम करने वाले 70 प्रतिशत से अधिक मजदूर उत्तर प्रदेश व बिहार से हैं।
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हरियाणा प्लाईवुड मैन्युफैक्चरिंग एसोसिएशन के जिला प्रधान जेके बिहानी ने बताया कि सात जुलाई को लक्कड़ मंडियां बंद हो गई थी। अब 13 से 16 जुलाई तक प्लाईवुड इंडस्ट्री को भी बंद कर दिया गया है। मंडी बंद होने से लकड़ी भी नहीं मिल पाती।
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