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Yamuna Nagar News: राजा परीक्षित, तक्षक नाग का सुनाया प्रसंग

Sun, 29 Sep 2024 02:05 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
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संवाद न्यूज एजेंसी
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साढौरा। क्षेत्र के दुर्गा मंदिर में चल रही सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का शनिवार को दूसरा दिन रहा। दूसरे दिन कथावाचक कैलाश चंद्र शास्त्री ने राजा परीक्षित मोक्ष का संगीतमय वर्णन किया। कैलाश शास्त्री ने कहा कि हर प्राणी के लिए श्रीमद्भागवत कथा सर्वश्रेष्ठ है। समीक ऋषि से श्रापित होने के बाद राजा परीक्षित को भागवत कथा के सुनने से मुक्ति मिली थी।
भागवत कथा सुनने से मनुष्य के सभी पापों का नाश होता है। उन्होंने बताया कि एक बार राजा परीक्षित वन में काफी दूर चले गए। रास्ते में उन्हें प्यास लगी तो पास में समीक ऋषि के आश्रम में पहुंचे और बोले ऋषिवर मुझे पानी पिला दीजिए। परंतु समीक ऋषि समाधि में थे। इसलिए परीक्षित को पानी नहीं पिला सके।
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परीक्षित ने सोचा कि समीक ऋषि ने उनका अपमान किया है। इसलिए मुझे भी इनका अपमान करना चाहिए। उसने पास से एक मृतक सर्प उठाया और समीक ऋषि के गले में डाल दिया और अपने नगर लौट आए। उस समय समीक ऋषि तो ध्यान में लीन थे उन्हें ज्ञात ही नहीं हुआ। परंतु उनके पुत्र ऋंगी ऋषि को जब इस बात का पता चला तो उन्हें राजा परीक्षित पर बहुत क्रोध आया। ऋंगी ऋषि ने कहा कि यदि यह राजा जीवित रहेगा तो ऋषियों का अपमान करेगा।
इस पर ऋषि कुमार ने कमंडल से जल लेकर तथा उसे मंत्रों से अभिमंत्रित करके राजा परीक्षित को यह श्राप दे दिया कि जा तुझे आज से सातवें दिन तक्षक सर्प डसेगा। समीक ऋषि को जब यह पता चला तो उन्होंने दिव्य दृष्टि से देखा कि यह तो महान धर्मात्मा राजा परीक्षित हैं और यह अपराध उन्होंने कलियुग के वशीभूत होकर किया है।
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समीक ऋषि ने जब यह सूचना जाकर परीक्षित महाराज को दी तो वह अपना राज्य अपने पुत्र जन्मेजय को सौंप कर गंगा नदी के तट पर पहुंचे। वहां बड़े ऋषि, मुनि, देवता आ पहुंचे और अंत में व्यास नंदन शुकदेव वहां पहुंचे। शुकदेव को देखकर सभी ने खड़े होकर उनका स्वागत किया। कथा के दौरान भजनों से ईश्वर की महिमा का गुणगान किया गया। भजनों पर श्रद्धालु जमकर थिरके।
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