यमुनानगर। जगाधरी के वार्ड नंबर तीन में संचालित तीन मेटल फैक्टरियों में केमिकल युक्त गंदा पानी बिना ट्रीटमेंट सीधे नालों में छोड़े जाने का मामला सामने आया है। नगर निगम की बजट बैठक में मुद्दा उठते ही प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मौके पर जांच करवाई। निरीक्षण के दौरान फैक्टरियों में लगाए गए ईटीपी (अपशिष्ट उपचार संयंत्र) बंद पाए गए। हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीम ने तीनों इकाइयों से वेस्ट पानी के सैंपल लेकर जांच के लिए भेज दिए हैं।
सोमवार को जिमखाना क्लब में हुई नगर निगम की बजट बैठक में वार्ड तीन के पार्षद जयंत स्वामी ने आरोप लगाया था कि फैक्टरियों से निकलने वाला केमिकल युक्त पानी सीधे नालों में डाला जा रहा है। इससे न केवल जल निकासी व्यवस्था प्रभावित हो रही है, बल्कि नालों के जाम होने की समस्या भी बढ़ती जा रही है। उन्होंने इसे जन स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बताया। काफी समय से ऐसा हो रहा है, लेकिन प्रशासन व प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों द्वारा इस दिशा में कोई कार्रवाई नहीं की जा रही। मामले की गंभीरता को देखते हुए डीसी प्रीति ने बैठक के दौरान ही अंडर ट्रेनिंग आईएएस सुमन को जांच के निर्देश देते हुए शाम तक रिपोर्ट देने को कहा। आदेश मिलते ही प्रशासनिक टीम वार्ड तीन में पार्षद जयंत स्वामी के साथ तीनों मेटल फैक्टरियों का औचक निरीक्षण करने पहुंच गई।
जांच के दौरान सामने आया कि केमिकल युक्त पानी को ट्रीट करने के लिए लगाए गए एसटीपी बंद पड़े थे। प्रारंभिक जांच में संकेत मिले कि गंदा पानी बिना शुद्धिकरण सीधे नालों में छोड़ा जा रहा था। अधिकारियों ने मौके पर ही आवश्यक दस्तावेजों की जांच की और प्लांट की कार्यप्रणाली के बारे में जानकारी जुटाई। हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के एसडीओ ने तीनों स्थानों से वेस्ट वाटर के सैंपल लिए। इन्हें लैब में जांच के लिए भेजा जाएगा, जहां पानी में रासायनिक तत्वों और प्रदूषण के स्तर की जांच की जाएगी। रिपोर्ट के आधार पर संबंधित फैक्टरियों के खिलाफ पर्यावरण नियमों के तहत कार्रवाई की जाएगी। निरीक्षण के दौरान पार्षद जयंत स्वामी और नगर निगम के चीफ सेनेटरी इंस्पेक्टर हरजीत सिंह भी मौजूद रहे।
मेटल फैक्टरियों में उत्पादन प्रक्रिया के दौरान निकलने वाला केमिकल युक्त अपशिष्ट जल पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। इस पानी को सुरक्षित रूप से शुद्ध करने के लिए फैक्टरियों में ईटीपी (अपशिष्ट उपचार संयंत्र) लगाया जाता है। ईटीपी का मुख्य कार्य औद्योगिक गंदे पानी से हानिकारक रसायन, भारी धातुएं, तेल-ग्रीस और ठोस कणों को अलग कर पानी को निर्धारित मानकों के अनुरूप बनाना है ताकि उसे नालों या पुनः उपयोग के लिए छोड़ा जा सके। ईटीपी में रासायनिक और भौतिक प्रक्रियाओं के माध्यम से पानी का पीएच संतुलित कर ठोस अपशिष्ट को अलग किया जाता है और जहरीले तत्वों को निष्क्रिय किया जाता है। इसके बाद ही पानी को डिस्चार्ज किया जाता है। यदि ईटीपी बंद रहता है और बिना ट्रीटमेंट के केमिकल युक्त पानी सीधे नालों में छोड़ा जाता है तो यह जमीन में जाकर पेयजल को प्रदूषित कर देता है।इससे त्वचा रोग, पेट संबंधी बीमारियां और अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न होने का खतरा बढ़ जाता है। संवाद