संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। श्री सनातन धर्म सभा संघर्ष समिति ने शुक्रवार को जिमखाना क्लब, जगाधरी में प्रेसवार्ता कर श्री सनातन धर्म सभा, मॉडल टाउन की कार्यप्रणाली, सदस्यता प्रक्रिया और वित्तीय मामलों को लेकर कई गंभीर आरोप लगाए। समिति के जिला प्रधान विरेंद्र अजमानी, महासचिव मनीष मालिक ने कहा कि सभा के संचालन में पारदर्शिता नहीं बरती जा रही है तथा पूरे मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए।
इस दौरान पूर्व उपाध्यक्ष अश्वनी नंदा, विपिन मोहन मेहता, पूर्व पार्षद विनोद मारवाह, सुभाष वोहरा, हेमंत शर्मा और सुरेंद्र नंदा की मौजूदगी में संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि वर्ष 2002 के चुनाव के बाद तत्कालीन प्रधान चमनलाल ढींगरा ने रणनीति के तहत स्वयं प्रधान पद संभाला। ढींगरा परिवार का मंदिर निर्माण में कोई आर्थिक योगदान नहीं था, बल्कि मंदिर का निर्माण मॉडल टाउन के लोगों के सहयोग से हुआ था।
समिति ने वर्तमान प्रधान हंसराज ढींगरा पर आरोप लगाया कि मंदिर परिसर की 22 दुकानों में से पांच दुकानें अपने और रिश्तेदारों के नाम आवंटित कर रखी हैं। आरोप है कि इन दुकानों का किराया बाजार दर से कम रखा गया और कुछ दुकानों को नियमों के विपरीत आगे किराये पर भी दिया गया। समिति ने कहा कि इन मामलों का कोई पारदर्शी रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है।
संघर्ष समिति का आरोप है कि विदेश में रहने वाले व्यक्ति सहित कुछ लोगों को सदस्य बनाया गया, जबकि समाज के 25 से अधिक पात्र लोगों के आवेदन बिना कारण अस्वीकार कर दिए गए। समिति का दावा है कि वर्तमान में मतदान का अधिकार सीमित सदस्यों तक ही है, जिनमें अधिकांश तीन परिवारों से जुड़े हैं। समिति ने आरोप लगाया कि बैठक आयोजित करने के लिए आवश्यक एनओसी मिलने के बावजूद एसडीएम कार्यालय ने अनुमति निरस्त कर दी। संघर्ष समिति ने मंदिर सभा, उससे संबद्ध स्कूल, सदस्यता प्रक्रिया और वित्तीय मामलों की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की है।
श्री सनातन धर्म सभा ने दी सफाई
वहीं श्री सनातन धर्म सभा आरोपों पर प्रेस वक्तव्य जारी किया है। सभा के प्रधान विजय कुमार मेहता, वरिष्ठ उप प्रधान राजीव वासुदेवा, सचिव नरेश ढींगरा, उप प्रधान सुभाष मेहता, कैशियर सौरभ मनिकटाला ने कहा कि पिछले लगभग तीन महीनों से कुछ लोग स्वयं को सनातनी बताते हुए सोशल मीडिया पर ऐसे संदेश और पोस्ट साझा कर रहे हैं, जिनमें सभा को विभिन्न विवादों से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। सभा ने स्पष्ट किया कि सभी कार्य नियम अनुसार हो रहे है। उसके उपनियम वर्ष 2013 से लागू हैं और इन्हीं नियमों के तहत संस्था का संचालन होता है। विपन मोहन को पहले ही कारण बताओ नोटिस जारी किया जा चुका है।