संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। थैलेसीमिया से पीड़ित बच्चों को दी जाने वाली दवा को स्वास्थ्य विभाग ने बदल दिया है। परिजनों का कहना है कि बदली गई दवा बच्चे खाने से इन्कार कर रहे हैं। बच्चों का कहना है कि दवा के टेस्ट में बहुत ज्यादा अंतर है। वहीं पीजीआई के डॉक्टर भी इस दवा के कम असरदार होने की बात कह रहे हैं।
इस संबंध में थैलेसीमिया वेलफेयर सोसायटी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी शिकायत भेजी है। यमुनानगर में थैलेसीमिया से ग्रस्त कुल 121 लोग हैं। इनमें 100 से ज्यादा बच्चे हैं। इस बीमारी में पीड़ितों को महीने में एक या इससे ज्यादा बार रक्त चढ़ाना पड़ता है। रक्त चढ़ाते समय आयरन को कंट्रोल करने के लिए जो दवा दी जाती है वह कुछ माह से स्वास्थ्य विभाग की ओर से बदल दी गई है। अब दूसरी कंपनी की दवा मरीजों को दी जा रही है।
अभिभावक रजनी, मनदीप ने बताया कि जब से विभाग ने दवा की कंपनी बदली है तब से वह बहुत परेशान हैं। बच्चे बदली हुई दवाई को नहीं खाते। इसके स्वाद में भी काफी अंतर है। दूसरा वह जब बच्चों को चेकअप के लिए पीजीआई लेकर जाते हैं तो वहां पर भी डॉक्टर यही कहते हैं कि नई दवा इस बीमारी पर कम असरदार है। ऐसे में उन्हें अपने बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर चिंता होने लगी है। यह बात उन्होंने जिला नागरिक अस्पताल में डॉक्टरों को भी बताई, परंतु अभी तक इस पर कोई निर्णय नहीं हुआ।
डॉक्टर ने बताया कम असरदार है दवा : रमन
थैलेसीमिया वेलफेयर सोसायटी के अध्यक्ष रमन मोंगा का कहना है कि पीजीआई के डॉक्टर बदली हुई कंपनी की दवा को कम असरदार बता रहे हैं। ऐसे में वह तो डॉक्टर की बात पर ही विश्वास करेंगे, क्योंकि वहीं पर उनका उपचार होता है। स्वास्थ्य विभाग से मिलने वाली दवा को न खाकर ज्यादातर मेडिकल स्टोर से दवा खरीदनी पड़ रही है। डेढ़ माह से उन्हें स्वास्थ्य विभाग से भी दवा मिलनी बंद हो गई है। इस संबंध में सोसायटी की तरफ से प्रधानमंत्री को भी पत्र लिखा गया है।
थैलेसीमिया पीड़ितों के लिए दवा जिलास्तर पर नहीं खरीदी जाती। यह दवा वेयरहाउस से आती है। बच्चे बदली हुई दवा को नहीं खा रहे हैं यह कम असरदार है, शिकायत हमारे पास आई है। इस बारे में पंचकूला में हुई बैठक में भी उच्चाधिकारियों को अवगत कराया गया है। - डॉ. निशा गुरावा, नोडल अधिकारी थैलेसीमिया।