संवाद न्यूज एजेंसी
साढौरा। अमृत सरोवर योजना के तहत नगरपालिका की ओर से कस्बा के दो पौराणिक सरोवरों तोरांवाला व गगड़वाला का जीर्णोद्धार किए जाने के बाद इन तालाबों में काई व जलीय खरपतवार नजर आने लगा है। इस समस्या के स्थाई समाधान के लिए युवा समाजसेवी पियूष छिब्बर ने दोनों सरोवरों में कॉपन कार्प किस्म की मछली का बीज छोड़ा है।
पियूष ने इस किस्म की मछली के लगभग एक लाख 70 हजार बीज तोरांवाला सरोवर में छोड़े हैं। इसके अलावा लगभग 30 हजार बीज को गगडवाला सरोवर में छोड़ा है। इस बीज का सारा खर्चा पियुष ने खुद ही वहन किया। पियुष छिब्बर का दावा है कि सर्वाहारी व शांत किस्म की यह मछली खुराक के तौर पर पानी की निचली सतह से जलकुंभी या चाइनीज़ झालर के अलावा काई, जलीय पौधों, शैवाल और पौधों के कंद जैसे जैविक पदार्थ को खाती है।
इससे इन सरोवरों में काई या जलकुंभी का अस्तित्व नहीं रहने से जल हमेशा स्वच्छ रहेगा। जल्दी बढ़ने वाली यह मछली बदलते मौसम की परिस्थितियों के अनुसार खुद को ढाल लेती है। इस मछली की तादाद बहुत जल्दी बढ़ जाती है। समाजसेवी संदीप गुप्ता के अलावा यहां रोजाना सैर करने आने वाले नवतेज सिंह बैंस, शिवदेव वर्मा व मुकेश गर्ग ने इस पहल के लिए पियुष छिब्बर को साधुवाद दिया।
उन्होंने कहा कि सरोवरों में काई व जलीय खरपतवार हो जाने से पानी प्रदूषित नजर आने लगा है। पियूष छिब्बर के प्रयास से यह सरोवरों का पानी स्वच्छ रहने से श्रद्धालुओं की भावनाओं को ठेस नहीं पहुंचेगी। समय के अनुसार मछलियों की संख्या बढ़ने पर उन्हें देखने के लिए बड़ी संख्या में कस्बावासी पहुंचने लगेंगे। इसलिए कस्बावासियों को इन मछलियों के लिए नित्य रूप से दाना डालना चाहिए। वहीं इन सरोवरों की पवित्रता बनाए रखने के लिए इनके किनारों व अंदर पॉलीथिन या अन्य सामग्री फेंकने से परहेज करना होगा।