यमुनानगर। जिले का प्लाईवुड उद्योग इन दिनों कई मोर्चों पर दबाव झेल रहा है। पॉपुलर और यूकेलिप्टस की लकड़ियों की कमी, कच्चे माल और केमिकल के बढ़ते दाम, श्रमिकों की कमी व नेपाल से आने वाले सस्ते उत्पादों की वजह से उद्योग की उत्पादन लागत लगातार बढ़ रही है। इससे प्लाईवुड की कीमतों में 10 से 15 प्रतिशत तक का उछाल आ चुका है।
यमुनानगर में करीब 350 प्लाईवुड फैक्टरियां संचालित हैं। यहां प्रतिदिन करीब 7000 क्यूबिक मीटर प्लाईवुड का उत्पादन होता है। उद्योग से जुड़े कारोबारियों के अनुसार कुल उत्पादन का 15 से 20 प्रतिशत हिस्सा दुबई, कतर, ओमान सहित कई खाड़ी देशों में निर्यात किया जाता रहा है। लेकिन मध्य-पूर्व में युद्ध और समुद्री मार्गों पर बढ़े जोखिम के कारण निर्यात लगभग रुक गया है।
वहीं कारोबारियों के अनुसार सबसे अधिक असर लकड़ी की उपलब्धता पर पड़ा है। कम कटान और मौसमी कारणों से टिंबर के दाम 10 से 15 प्रतिशत तक बढ़ गए हैं। दूसरी ओर प्लाईवुड निर्माण में इस्तेमाल होने वाले फॉर्मल्डिहाइड, फिनाइल और मेलामाइन जैसे रसायनों की कीमतों में भी भारी बढ़ोतरी हुई है।
फॉर्मल्डिहाइड जो पहले 17 से 18 रुपये प्रति किलो मिलता था, अब करीब 35 रुपये प्रति किलो पहुंच गया है। वाटरप्रूफ प्लाई बनाने में इस्तेमाल होने वाला फिनाइल 110 रुपये से बढ़कर करीब 200 रुपये प्रति किलो हो गया है। वहीं प्लाई की मजबूती बढ़ाने वाला मेलामाइन 120 रुपये से बढ़कर करीब 180 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है।
प्लाईवुड उद्योग में इस्तेमाल होने वाले पेट्रोलियम आधारित केमिकल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। कारोबारियों के अनुसार कच्चे तेल की वैश्विक महंगाई और अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के चलते फॉर्मल्डिहाइड, फिनाइल और मेलामाइन जैसे रसायन महंगे हो गए हैं।
इनकी बढ़ी कीमतों का सीधा असर उत्पादन लागत पर पड़ रहा है, जिससे प्लाईवुड बनाना पहले की तुलना में काफी महंगा हो गया है। उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि यदि यही स्थिति लंबे समय तक बनी रही तो हरियाणा का प्रमुख प्लाईवुड उद्योग गंभीर संकट में आ सकता है और भविष्य में उद्योगों के पलायन जैसी स्थिति भी पैदा हो सकती है। संवाद
श्रमिकों की कमी से बढ़ी मुश्किलें
कारोबारियों के अनुसार नेपाल से बड़ी मात्रा में प्लाईवुड बिहार, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल के बाजारों में पहुंच रहा है, जिससे यमुनानगर के उत्पादों की मांग प्रभावित हुई है। वहीं पश्चिम बंगाल चुनाव के बाद बाहर गए श्रमिकों में से केवल एक चौथाई ही लौटे हैं। श्रमिकों की कमी के कारण कई फैक्ट्रियां मात्र 33 प्रतिशत क्षमता पर उत्पादन कर रही हैं और उद्योगपति मजदूरों की अधिकांश मांगें मानने को मजबूर हैं।
प्लाईवुड में इस्तेमाल होने वाला फॉर्मल्डिहाइड कच्चे तेल की महंगाई के कारण अब इसकी कीमत बढ़कर करीब 35 रुपये प्रति किलोग्राम पहुंच गई है। - अंकुर जैन
पेट्रोलियम आधारित केमिकल के दाम बढ़ने से उत्पादन लागत लगातार बढ़ रही है। मजबूरी में उद्योगों को तैयार माल की कीमतों में 10 से 15 प्रतिशत तक बढ़ोतरी करनी पड़ी है। - मुदित अग्रवाल
नेपाल से आने वाली सस्ती प्लाईवुड की आपूर्ति ने भी स्थानीय उद्योग को बड़ा झटका दिया है। बिहार, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल जैसे बड़े बाजारों में उत्पादों की मांग प्रभावित हुई है। - भुवनेश दुग्गल
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद वहां गए अधिकांश श्रमिक वापस नहीं लौटे और केवल एक चौथाई श्रमिक ही उद्योगों में पहुंचे हैं। श्रमिकों की कमी के कारण उद्योग प्रभावित हो रहा है। -गौरव चौपाल
फैक्टरी में प्लाई तैयार करते मजदूर। संवाद
फैक्टरी में प्लाई तैयार करते मजदूर। संवाद
फैक्टरी में प्लाई तैयार करते मजदूर। संवाद
फैक्टरी में प्लाई तैयार करते मजदूर। संवाद