यमुनानगर। इस साल धान की सरकारी खरीद समय से पहले शुरू हो गई थी। इसके बाद भी जिला धान की खरीद में पिछड़ा हुआ है। अभी तक अनाज मंडियों में केवल 181947 मीट्रिक टन धान की ही खरीद हो पाई है। जबकि, पिछले साल 15 अक्तूबर तक मंडियों में 356911 मीट्रिक टन धान खरीदा जा चुका था। ऐसा भी नहीं है कि मंडियों में धान कम आ रहा हो। मंडियों में धान लेकर आने वाले वाहनों का कतार लगी है। किसानों का आरोप है कि जानबूझ कर मंडियों में धान की खरीद कम दिखाई जा रही है। मंडियों में धान तो पिछले साल से ज्यादा आ चुका है, लेकिन खरीद कम दिखाई जा रही है।
यह सब इसलिए किया जा रहा है कि कोई धीमे उठान पर सवाल खड़े न करे क्योंकि मंडियां धान की बोरियों से अटी पड़ी है। यदि खरीद ज्यादा दिखाएंगे तो उसके मुकाबले कम हुए उठान पर जवाब देना पड़ेगा। इससे यही वजह है कि मंडियों में रोजाना जितनी धान आ रही है उसकी आधी ही खरीद कागजों में दिखाई जा रही है। वहीं किसानों को अब तक करीब 106 करोड़ रुपये की पेमेंट खरीद एजेंसियों द्वारा की जा चुकी है। हाथ में धान की राशि आने से किसानों को काफी राहत मिली है।
सरस्वतीनगर में सबसे ज्यादा खरीद
डीसी कैप्टन मनोज कुमार ने बताया कि जिले की सभी 13 मंडियों में 181947 मीट्रिक टन ग्रेड-ए धान की आवक हो चुकी है। इसमें खाद्य एवं आपूर्ति विभाग ने 106944, हैफेड ने 39982 और हरियाणा भंडारण निगम ने 35021 मीट्रिक टन धान की खरीद की है। उन्होंने बताया कि बिलासपुर अनाज मंडी में 15012 छछरौली अनाज मंडी में 20182 , गुमथला राव अनाज मंडी में 2411 , जगाधरी अनाज मंडी में 36407 मीट्रिक टन की खरीद की गई है। वहीं जठलाना अनाज मंडी में 1549 , खारवन मंडी में 313, प्रतापनगर अनाज मंडी में 19066, सरस्वतीनगर अनाज मंडी में 42770 मीट्रिक टन, रादौर अनाज मंडी में 13322 मीट्रिक टन की खरीद हुई है। रणजीतपुर मंडी में 8047 मीट्रिक टन, रसूलपुर अनाज मंडी में 6428 मीट्रिक टन, साढौरा अनाज मंडी में 13449 मीट्रिक टन व यमुनानगर अनाज मंडी में 167 मीट्रिक टन धान की खरीद की गई है।