यमुनानगर। जिले के ट्रामा सेंटर को स्वास्थ्य विभाग को हैंडओवर करने की प्रक्रिया एक बार फिर अटक गई है। ग्राउंड फ्लोर के नवीनीकरण में सिविल कार्य पूरा हो जाने के बावजूद इलेक्ट्रिक विंग का काम अधूरा रहने से ट्रामा सेंटर अब भी उपयोग में नहीं आ सका है। अभी भवन में आवश्यक इलेक्ट्रिक कार्यों के लिए करीब 92 लाख रुपये का अतिरिक्त बजट स्वीकृत किया गया है। इसके लिए पीडब्ल्यूडी की ओर से टेंडर प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इसके बाद वर्क ऑर्डर और फिर कार्य पूरा होने में लगने वाले समय को देखते हुए अगले तीन से चार माह तक ट्रामा सेंटर का हैंडओवर होना मुश्किल माना जा रहा है। किस्तों में किया जा रहा ट्रामा सेंटर का नवीनीकरण मरीजों के लिए परेशानी का कारण बन गया है।
सबसे बड़ी चिंता यह है कि आने वाला समय गर्मी का है और ट्रामा सेंटर में एसी लगाए जाना अनिवार्य है। इसके अलावा ऑक्सीजन और वैक्यूम पाइपलाइन, सीसीटीवी कैमरे, फायर सेफ्टी उपकरण समेत कई जरूरी सिस्टम अभी तक नहीं लगाए गए हैं। ये सभी कार्य टेंडर प्रक्रिया के तहत होंगे, जिससे प्रक्रिया और लंबी होने की आशंका है। जब तक ये सुविधाएं नहीं होंगी, तब तक स्वास्थ्य विभाग ट्रामा सेंटर को टेकओवर करने को तैयार नहीं है।
जानकारी के अनुुसार ट्रामा सेंटर को जनवरी 2025 तक हैंडओवर करना था लेकिन समय पर पूरा नहीं हो सका। इसके बाद जनवरी 2026 में ट्रामा सेंटर के शुरू होने की उम्मीद जताई गई थी, जो अब नए इलेक्ट्रिक कार्यों के चलते फिर खटाई में पड़ती नजर आ रही है। करीब 15 साल पुराने ट्रामा सेंटर भवन के ग्राउंड फ्लोर का नवीनीकरण लगभग 82 लाख रुपये की लागत से कराया गया है। इसके चलते जून 2024 में ट्रामा सेंटर को मुकंद लाल जिला नागरिक अस्पताल के ब्लॉक-ए में अस्थायी रूप से शिफ्ट किया गया था। स्थिति यह है कि जहां पहले ट्रामा सेंटर दो मंजिला भवन में संचालित होता था, वहीं अब वह अस्पताल के एक छोटे से हॉल में सिमट कर रह गया है। जगह की भारी कमी के कारण इमरजेंसी में आने वाले गंभीर मरीजों के लिए पांच बेड बरामदे में लगाने पड़ रहे हैं, जिससे मरीजों और उनके परिजनों को गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
अगस्त 2024 में शुरू हुआ था नवीनीकरण
पीडब्ल्यूडी के ठेकेदार ने अगस्त 2024 में नवीनीकरण कार्य शुरू किया था, लेकिन भुगतान न मिलने के कारण सितंबर में काम बंद कर दिया गया। बाद में भुगतान होने पर काम दोबारा शुरू हुआ, लेकिन तभी बिजली से संबंधित कार्यों की जरूरत सामने आने पर सिविल वर्क को बीच में ही रोक दिया गया। पीडब्ल्यूडी के इलेक्ट्रिक विंग द्वारा कई महीनों तक टेंडर न लगाने से पूरा प्रोजेक्ट और लटकता चला गया। हालांकि सिविल वर्क पूरा हो गया है। इसके तहत ग्राउंड फ्लोर को ऊंचा किया गया है। नई टाइलें, दरवाजे, शौचालयों का नवीनीकरण, पेंट और दीवारों में बदलाव किए गए हैं। छत में फॉल सिलिंग भी लगाई जा चुकी है, लेकिन बिना जरूरी इलेक्ट्रिक सुविधाओं के यह सब फिलहाल अधूरा साबित हो रहा है। नवीनीकरण में हो रही देरी का सीधा असर जिले की आपात स्वास्थ्य सेवाओं और इमरजेंसी में आने वाले मरीजों पर पड़ रहा है। संवाद
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वर्जन:
ट्रामा सेंटर में एसी लगाने के अलावा अन्य इलेक्ट्रिक कार्य होने हैं। इसके लिए करीब 92 लाख रुपये का बजट मिला है। पीडब्ल्यूडी इसे टेंडर के माध्यम से करवाएगा। यदि ट्रामा सेंटर में शिफ्ट हो जाते तो फिर से तोड़फोड़ के चलते मरीजों व स्टाफ को परेशानी होती। इसलिए अब इलेक्ट्रिक कार्य पूरा होने के बाद ही इसमें शिफ्ट होंगे।
- डॉ. जितेंद्र सिंह, सिविल सर्जन, यमुनानगर।
नवीनीकरण के चलते ट्रामा सेंटर पर लटका ताला। संवाद