संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज ने बुधवार को खेड़ा मंदिर में धर्मसभा के दौरान प्रवचन दिए। उन्होंने कहा हिंदू धर्म के अनुसार सभी को भयमुक्त व भेद रहित शिक्षा प्रदान करना जरूरी है। यदि अखंड भारत बनाना है तो वर्तमान भारत की शिक्षा पद्धति में सुधार जरूरी है। गुरुकुल चलाने के नाम पर एनसीआरटी की पुस्तकों को बढ़ावा दिया जा रहा है, जो सही नहीं है। गुरुद्वारा पद्धति व परंपरा को प्राचीन शिक्षा पद्धति के अनुसार चलाया जाए।
उन्होंने कहा कि धर्म संबंधित समस्या के निवारण के लिए कार्य किया जा रहा है। किसी भी संस्था व व्यक्ति धर्म को लेकर किसी प्रकार की समस्या सुनकर उसका निवारण किया जाएगा, जिसके लिए संपर्क नंबर जारी किया जाएगा। भक्त ई-मेल, व्हाट्सएप व पत्राचार से अपनी समस्याएं रख सकते हैं। जिसका धर्म के अनुसार निवारण किया जाएगा। धर्म संबधित समस्यों के निवारण के लिए जल्द की एक बेवसाइट बनाई जाएगी। जिस पर लोग अपनी धर्म संबधी समस्या दर्ज करवाकर पंजीकरण नंबर प्राप्त कर सकेंगे। उन्होंने कहा कि महार्षि वेद व्यास ने ज्ञान का दिया जलाया है। उनकी साहित्य रचना के प्रकाश में हम जीवन जी रहे हैं। व्यास न होते तो उनके द्वारा पुराणों, महाभारत का प्रणयन न किया जाता, वेदों का सृजन न किया गया होता। जिससे समस्त संसार में अंधेरा होता।
व्यास के मन में हर एक के लिए करुणा व प्रेम निहित था। ऋषि वेद व्यास का जब अवतार हुआ, तो उस समय की स्थिति में लोगों की धारणा कमजोर हो चुकी थी। पहले हमारे गुरुकुल में वेदाध्यापन होता था। समग्र वेद में एक लाख मंत्र हमारे छात्र कंठस्थ कर लेते थे। चूंकि उस समय उनकी धारण शक्ति अच्छी होती थी। एक लाख मंत्रों का उपदेश गुरु करवाता था। जैसे पर्यावरण प्रदूषित होने लगा हमारी वेद मंत्र स्मरण शक्ति कमजोर होने लगी। इसका परिणाम यह हुआ कि समग्र वेद धारण करने में बालक सक्षम नहीं हो रहे थे। ऐसे समय में व्यास के मन में करुणा उत्पन्न हुई और उन्होंने एक ही वेद को चार भाग में बांट दिया। ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद में बांटा। व्यास ने कहा कि यदि इसका एक भाग भी कोई पढ़ लेगा तब वह वेद पढ़ा माना जाएगा। उसकी शाखा प्रशाखा बना दी। यदि एक शाखा भी पढ़ लोगे तो भी वेद का पढ़ा माना जाएगा। इसके बाद उन्होंने सोचा कि अब सबके मन में सुख होगा, लेकिन फिर उन्होंने देखा जो लोग सेवा कार्य में लगे हुए हैं। वह लोग वेद अध्ययन से वंचित हो रहे हैं। उनमें शूद्र, बंधु व माताएं हैं। यह लोग हरदम सेवा सहयोग में लगे रहते हैं। इसलिए इनके पास अध्ययन का उतना समय नहीं है। इन्हें ज्ञान देने के लिए महाभारत की रचना की गई। एक लाख श्लोकों का ग्रंथ बनाया गया और उसमें वेदों का सार समर्पित कर दिया गया। स्वामी सरस्वती महाराज ने आदिबद्री में पहुंच कर पूजा अर्चना की। श्रीआदि ब्रदी में संचालित गुरुकुल के शिष्यों से मिलकर कार्यप्रणाली जानी। इस दौरान प्रेमचंद, खेमचंद, राहुल अग्रवाल, अजय अग्रवाल, मोहित अग्रवाल, सुलेखचंद अग्रवाल, रोबिन अग्रवाल, मामचंद अग्रवाल, पंकुश खुराना, नरेश गर्ग सहित अन्य मौजूद रहे।
18 पुराण व 18 उपपुराण बनाए
उन्होंने बताया कि ऋषि व्यास ने 18 पुराण व 18 उपपुराण बनाए, जो गुण ज्ञान वेदों से हैं। उसे सरल शब्दों में उदाहरण से कथा द्वारा लोगों को ज्ञान दिया। साहित्य संसार गुरु व्यास का है। व्यास के बाद जितने साहित्यकार आए हैं वह सब व्यास का कहा गया है और वे अपनी शैली में कह रहे हैं। कुछ नया नहीं कह पा रहे हैं, चूंकि व्यास ने कुछ छोड़ा नहीं हैं। व्यास ने सभी विषयों का वर्णन कर दिया हैं। ऐसे व्यास जी का परम व पवित्र नगर व्यासपुर जिसे लोग बिलासपुर कहते हैं, यह व्यास नगर है। श्रीआदि बद्री के ब्रह्मचारी महंत विनय स्वरूप ने कहा कि कार्तिक पूर्णिमा पर कपालमोचन मेला हिंदू, सिख व अन्य धर्म को जोड़ने वाला होता है। मेले के दौरान देश से कई धर्मों व संप्रदायों के संत महात्मा आते हैं, लेकिन डंडी स्वामी के संत महात्मा नहीं आते हैं। मेले में डंडी स्वामी के महात्मा पहुंचने से मेले का धार्मिक व सामाजिक दृष्टि महत्व बढ़ जाएगा।