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निजी स्कूल संचालक और अभिभावक आमने-सामने

Tue, 12 Apr 2016 12:40 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, यमुनानगर
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‌निजी स्कूलों के ‌खिलाफ विद्रोह - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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यमुनानगर। निजी स्कूलों में कथित हर वर्ष रि-एडमिशन फीस लेने व सिलेबस चेंज कर महंगी किताबें देने के मामले में अभिभावक व स्कूल संचालक आमने-सामने आ गए हैं। सोमवार को एक ओर अभिभावकों ने निजी स्कूलों के खिलाफ रोष-प्रदर्शन किया वहीं स्कूल संचालकों ने भी उन्हें आरोप लगाकर बदनाम करने के रोष में सांकेतिक हड़ताल कर स्कूलों को बंद रखा। अभिभावकों की ओर से जागरूक अभिभावक संघ व आल इंडिया उद्योग व्यापार मंडल ने अलग-अलग अधिकारियों को ज्ञापन सौंपे। इनमें केंद्रीय शिक्षामंत्री स्मृति ईरानी व सीएम खट्टर से निष्पक्ष कार्रवाई की मांग की गई।
सोमवार सुबह करीब साढ़े दस बजे जागरूक अभिभावक संघ के बैनर तले विभिन्न स्कूलों में पढ़ रहे बच्चों के करीब सौ से अधिक अभिभावक एकत्रित हुए। यहां से संघ के प्रधान राजेश सचदेवा के नेतृत्व में सभी अभिभावकों ने रोष मार्च निकाला। इस दौरान अभिभावकों ने हाथ में विभिन्न तख्तियां लेकर शिक्षा के नाम पर हो रही लूट-खसोट बंद करो-बंद करो, शिक्षा माफिया प्राइवेट स्कूल हाय-हाय के नारे लगाए। इसी तरह लघु सचिवालय परिसर में पहुंचकर प्रदर्शनकारियों ने करीब आधे घंटे तक जोरदार नारेबाजी की। बाद में डीसी के व्यस्त होने पर तहसीलदार दर्शन कुमार को सीएम मनोहर लाल खट्टर के नाम ज्ञापन सौंपा गया। इसके माध्यम से कहा गया कि निजी स्कूलों में हर साल अगली कक्षा में दाखिले के लिए रि-एडमिशन फीस और बार-बार सिलेबस व ड्रेस कोर्ड बदलकर महंगी किताबें व यूनिफार्म बेची जा रही हैं। मनमर्जी की रकम लेकर पक्का बिल भी नहीं दिया जाता है। इसके अलावा एनुअल चार्ज, बिल्डिंग फंड आदि अभिभावकों से वसूले जाते हैं। यहीं नहीं जेनरेटर, कंप्यूटर व एक्टीविटी चार्ज अलग से थोप दिए जाते हैं। उन्होंने सीएम खट्टर से मांग की कि स्कूलों में हो रही लूट-खसोट ओर शिक्षा के नाम पर हो रहे बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ का रोका जाए। संघ के पदाधिकारियों ने तहसीलदार दर्शन कुमार को ज्ञापन देने के बाद डीसी डॉ. एसएस फूलिया से मुलाकात कर उन्हें भी मामले से अवगत कराया। डीसी ने अभिभावकों को उचित कार्रवाई का आश्वासन देते हुए कहा कि उनका ज्ञापन सीएम तक पहुंचा दिया जाएगा। इस मौके पर जागरूक अभिभावक संघ के उप प्रधान पंकज मित्तल, कोषाध्यक्ष कमलजीत सिंह, सह सचिव राजेश सेठी, महासचिव आशीष मित्तल समेत करीब सौ से अधिक अभिभावक मौजूद रहे।
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डीईओ मांगते हैं शिकायत, सबूत दो तो करते हैं टाल-मटोल: ज्ञापन के माध्यम से संघ की ओर से कहा गया कि निजी स्कूलों की मनमानी बारे जिला शिक्षा अधिकारी को अवगत कराने पर वह शिकायत न होने की बात कहते हैं। इस पर जब भी उन्हें शिकायत व सबूत दिया जाए, तो वह टाल-मटोल करते हैं। उन्होंने मांग की कि सभी सरकारी अधिकारी व कर्मचारियों, मंत्रियों, विधायकों, सांसदों व विशेष रूप से शिक्षा विभाग के सभी कर्मचारियों व अध्यापकों के बच्चे सरकारी स्कूल में ही पढ़े, इस प्रकार का विशेष कानून लागू किया जाए।



मंडल ने भी डीसी और डीईओ को दिए ज्ञापन:  निजी स्कूलों द्वारा अभिभावकों के शोषण के विरोध में आल इंडिया उद्योग व्यापार मंडल भी आगे आया। सोमवार को मंडल के पदाधिकारी लघु सचिवालय पहुंचे और नारेबाजी कर रोष जताने के बाद मंडल का प्रतिनिधिमंडल डीसी डॉ. एसएस फूलिया से मिला। इस दौरान मंडल के प्रदेशाध्यक्ष महेंद्र कुमार मित्तल के नेतृत्व में डीसी डॉ. एसएस फूलिया को केंद्रीय शिक्षा मंत्री स्मृति ईरानी के नाम ज्ञापन सौंपा गया। इसके बाद जिला शिक्षा अधिकारी की गैर-मौजूदगी में सुप्रीडेंट को मंडल के पदाधिकारियों ने ज्ञापन सौंपा। इसके माध्यम से मंडल की ओर से कहा गया कि प्रदेश के प्राइवेट स्कूलों द्वारा बच्चों के दाखिले के नाम पर धांधली और मनमानी की जा रही है। शिक्षा विभाग के निर्देश हैं कि स्कूल बच्चों से पहली, छठी, नौवीं और 11वीं कक्षा में ही दाखिला फीस ले सकता है। किंतु प्राइवेट स्कूल कानून को ताक पर रख कई वर्षों से हर वर्ष बच्चों के अभिभावकों सें दाखिला फीस वसूल कर रहे हैं। स्कूलों द्वारा अभिभावकों से दाखिला, सालाना व ट्यूशन फीस समेत कई तरह के चार्ज लिए जा रहे हैं। मौके पर प्रदेश महामंत्री संजय मित्तल विक्रम चौहान, राकेश वर्मा, तारा चंद्र सैनी, रक्षा मित्तल, रवि अंठाले भान सिंह, सुशील पाल, दीप्ती शर्मा, नितिन टापू, सरदास बलविंद्र सिंह आदि मौजूद रहे।

ज्ञापन के माध्यम से रखीं ये मांगें:-
भारतीय शिक्षा बोर्ड का गठन किया जाए, ताकि अलग-अलग बोर्ड के नाम पर होने वाली लूट-खसोट और भ्रष्टाचार व शोषण पर लगाम लगे।
पहली, छठी, नौवी और 11वीं कक्षा में ही निजी स्कूल दाखिला फीस लें और हर कक्षा के लिए दाखिला हेतु फीस लेने पर पूर्णतया प्रतिबंध लगे।
सालाना फीस के नाम पर भारी भरकम व एकमुश्त ली जाने वाली राशी पर पूर्णतया रोक लगे।
स्कूलों द्वारा ली जाने वाली फीस और दी जाने वाली सुविधाओं का पूर्ण ब्यौरा स्कूल के बाहर डिस्पले बोर्ड पर लिखा जाए।
धारा 134-ए के तहत आने वाले सभी गरीब बच्चों का दाखिला सुनिश्चित और प्रक्रिया को आसान की जाए।
स्कूलों में चल रही दुकानों को बंद किया जाए व टैंपेरेरी दुकानों की जांच हो, जिन्होंने सेल-प्रचेज नंबर नहीं लिया हो और गलत पाए जाने पर सख्त कार्रवाई हो।



सांकेतिक हड़ताल में संचालकों ने बंद रखें निजी स्कूल
बोले, दाखिले के समय स्कूलों पर बनाया जा रहा दबाव, अभिभावकों की आड़ में दूसरे लोग कर रहे प्रदर्शन
यमुनानगर। निजी स्कूल संचालकों ने उन्हें बदनाम करने के रोष में सांकेतिक हड़ताल का फैसला कर स्कूलों को बंद रखा। सोमवार को ट्विन सिटी के लगभग सभी निजी स्कूल बंद रहे और संचालकों ने हुडा सेक्टर-17 स्थित जिमखाना क्लब में बैठक कर आगे की रणनीति बनाई।  इस दौरान स्कूल संचालकों ने आरोप लगाया कि अभिभावकों की आड़ में दूसरे लोग स्कूलों में आकर व उनके बाहर प्रदर्शन कर स्कूल को बदनाम कर रहे हैं और माहौल बिगाड़ रहे हैं।
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हुडा सेक्टर-17 के जिमखाना क्लब में  दि डिस्ट्रीक पब्लिक स्कूल एसोसिएशन यमुनानगर के बैनर तले हुई बैठक में करीब 52 स्कूलों के संचालक शामिल रहे। आपसी मीटिंग के बाद एसोसिएशन के प्रवक्ता ओपी तनेजा ने कहा कि वह लोग कोर्ट व सरकार के आदेशों की हर सूरत में पालना करने के लिए तैयार हैं। हालांकि कुछ लोग अभिभावक न होते हुए भी स्कूल में आकर और बाहर रोष प्रदर्शन कर माहौल को खराब कर रहे हैं। ऐसे में स्कूल संचालक बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं। उन्होंने कहा कि कई स्कूलों में ऐसी घटनाएं हो चुकी हैं। इस पर रोष जताने के लिए आज सांकेतिक तौर पर एक दिन की हड़ताल कर स्कूलों को बंद रखा गया है।
 
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