संवाद न्यूज एजेंसी
साढौरा। कस्बे के एक निजी स्कूल ने दाखिला और अन्य मदों की फीस लेने के बाद अचानक विद्यालय बंद कर दिया। इससे करीब 30 विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो गई है। कई अभिभावकों को बच्चों की स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट (एसएलसी) के लिए खंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) कार्यालय के चक्कर काट रहे हैं।
वहीं शिक्षकों ने भी स्कूल प्रबंधन पर वेतन नहीं देने का आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज कराई थी। बीईओ के हस्तक्षेप के बाद शिक्षकों का बकाया वेतन मिल गया, लेकिन अभिभावकों की फीस वापसी का मामला अब भी अधर में है। शिकायतकर्ता राममूर्ति ने बताया कि उन्होंने अप्रैल 2026 में अपने पांच वर्षीय बेटे आर्यन का दाखिला साढौरा के एक निजी स्कूल में कराया था।
दाखिले के समय स्कूल संचालक और प्राचार्या ने प्रवेश शुल्क, किताबें, वर्दी और मासिक फीस सहित कुल 7,500 रुपये जमा करवाए। 25 मई को ग्रीष्मकालीन अवकाश होने के बाद जब एक जुलाई को स्कूल खुलना था। वह बेटे को लेकर पहुंचे तो स्कूल का गेट बंद मिला। राममूर्ति के अनुसार संचालक से संपर्क करने पर उन्हें बताया गया कि स्कूल बंद कर दिया गया है।
संचालक ने कुछ दिन बाद आकर जमा राशि वापस लेने और बच्चे का किसी दूसरे स्कूल में दाखिला कराने की बात कही। आरोप है कि कई बार चक्कर लगाने के बावजूद न तो राशि लौटाई गई और न ही कोई स्पष्ट जवाब दिया गया। उल्टा पैसे मांगने पर स्कूल संचालक ने गाली-गलौज की और जान से मारने की धमकी दी।
अभिभावकों का कहना है कि स्कूल के अचानक बंद होने से बच्चों की पढ़ाई बाधित हुई है। कई विद्यार्थियों को समय पर एसएलसी नहीं मिलने से दूसरे स्कूलों में दाखिला लेने में भी परेशानी हुई। हालांकि, बीईओ के हस्तक्षेप के बाद विद्यार्थियों को एसएलसी मिल गई, लेकिन फीस वापसी का मुद्दा अब भी जस का तस बना हुआ है।
ज्यादातर बच्चों की एसएलसी दिला दी : बीईओ
खंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) धर्म सिंह राठी ने बताया कि शिकायत मिलने के बाद मामले की जांच शुरू कर दी गई है। स्कूल की मान्यता, फीस संबंधी नियमों और अन्य तथ्यों की भी जांच की जाएगी। ज्यादातर बच्चों की एसएलसी दिला दी गई है। जांच में अनियमितता या नियमों का उल्लंघन सामने आता है तो स्कूल प्रबंधन के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।