संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। कैदी जेल में अपनी हाथों का हुनर दिखा रहे हैं। वे जेल के कारखाने में लकड़ी से निर्मित फर्नीचर को तैयार कर रहे हैं। फर्नीचर भी शीशम की लकड़ी से तैयार किया जा रहा है। इनमें लकड़ी के कॉर्नर, स्टूल, कुर्सियां व बालकनी आदि शामिल है।
जिला जेल में फर्नीचर के लिए विशेष कारखाना लगाया हुआ है। जहां पर लकड़ी के अलावा लोहे का भी फर्नीचर तैयार किया जाता है। इस फर्नीचर को 100 कैदी अपनी कला से तैयार करने में लगे हैं। इतना ही नहीं यमुनानगर की जेल में तैयार किए जाने वाले लकड़ी के फर्नीचर की डिमांड हरियाणा के कई जिलों में भी है। ऑर्डर पर भी यहां लकड़ी का फर्नीचर तैयार किया जाता है।
खास बात ये है फर्नीचर में केवल शीशम की लकड़ी का ही प्रयोग होता है इसलिए यहां के फर्नीचर की ज्यादा डिमांड है। आयुर्वेदिक प्रोडक्ट के अलावा जेल में लकड़ी से बनी कुर्सियां, बेड, शो पीस और आयरन सेक्शन में लोहे की अलमारियां बनाई जा रही हैं। जेल में हॉस्पिटल बेड भी बनाए जाते हैं। पॉट्स, स्टैंड्स और अन्य कई वस्तुओं को तैयार करवाया जा रहा है। जेल प्रशासन के पास 25 से अधिक आयुर्वेदिक प्रोडेक्ट्स के लाइसेंस हैं।
पिछले साल कुरुक्षेत्र में आयोजित हुई गीता जयंती में भी जेल से तैयार किए गए सामान को काफी सराहा गया है। इसके अलावा अगले वर्ष फरवरी माह में फरीदाबाद में सूरजकूंड मेला लगाया जाना है, उसके लिए अभी से जेल फैक्टरी में प्रोडक्टस को तैयार किया जा रहा है।
जेल कारखाने में कैदियों व बंदियों की ओर से लकड़ी से निर्मित फर्नीचर तैयार किया जा रहा है। मांग के अनुसार फर्नीचर भी तैयार किया जाता है। करीब सौ से अधिक कैदी-बंदी इसमें लगे हैं। उनकी कला को देखकर हर कोई चकित भी रह जाता है। - विशाल छिब्बर, सुपरिटेंडेंट, जिला जेल यमुनानगर।