फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Yamuna Nagar News: 5 से 10 फीसदी तक बढ़े किताबों और कॉपियों के दाम

Sat, 04 Jul 2026 12:52 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
विज्ञापन
मंजू रानी।
विज्ञापन
अशोक कुमार
विज्ञापन

यमुनानगर। जिले में नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत के साथ ही स्टेशनरी, स्कूल यूनिफॉर्म, बैग और अन्य शैक्षणिक सामग्री के बाजार में एक बार फिर रौनक लौट आई है। कारोबारियों के अनुसार पिछले वर्ष की तुलना में किताबों, कॉपियों और स्टेशनरी के अन्य सामान के दामों में करीब 5 से 10 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हुई है।
करीब एक माह तक ग्रीष्मकालीन अवकाश के कारण सुस्त पड़ा कारोबार अब गति पकड़ने लगा है। स्कूल खुलते ही अभिभावक बच्चों के लिए किताबें, कॉपियां, बैग, यूनिफॉर्म, जूते, टिफिन और पानी की बोतल सहित अन्य जरूरी सामान खरीदने बाजार पहुंच रहे हैं। इससे शहर के प्रमुख स्टेशनरी बाजारों में ग्राहकों की संख्या लगातार बढ़ रही है और कारोबारियों को जुलाई माह में बेहतर बिक्री की उम्मीद है।
विज्ञापन


जिले में करीब 700 छोटी-बड़ी स्टेशनरी की दुकानें संचालित हैं। इनमें से अधिकांश दुकानों का कारोबार स्कूलों और कॉलेजों पर निर्भर रहता है। छुट्टियों के दौरान बिक्री काफी कम हो गई थी, लेकिन अब स्कूल खुलने के साथ ही बाजारों में फिर से चहल-पहल दिखाई देने लगी है। खासकर स्कूलों के आसपास स्थित दुकानों पर सुबह और दोपहर के समय अभिभावकों और विद्यार्थियों की अच्छी-खासी भीड़ देखने को मिल रही है।

इस बार महंगाई का असर भी शिक्षा से जुड़े सामान पर साफ दिखाई दे रहा है। हालांकि सीबीएसई और हरियाणा बोर्ड की एनसीईआरटी आधारित पुस्तकों के दामों में पिछले छह माह के दौरान कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ है, लेकिन निजी प्रकाशकों की पुस्तकों के सेट महंगे हो गए हैं। अलग-अलग स्कूलों द्वारा अलग-अलग प्रकाशकों की पुस्तकें निर्धारित किए जाने के कारण एक समान मूल्य सूची उपलब्ध नहीं है।

सिंगला बुक भंडार के संचालक सुनील सिंगला ने बताया कि निजी स्कूलों में पहली से छठी कक्षा तक का पुस्तक सेट करीब 3000 रुपये, सातवीं का लगभग 3600 रुपये, आठवीं का करीब 4000 रुपये, नौवीं का एनसीईआरटी आधारित सेट करीब 3000 रुपये तथा दसवीं का लगभग 3200 रुपये तक पहुंच जाता है। उन्होंने बताया कि कागज की कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर स्टेशनरी पर पड़ा है। पहले 80 रुपये में मिलने वाला रजिस्टर अब 100 रुपये तक पहुंच गया है। कई कंपनियां कीमत बढ़ाने के बजाय रजिस्टर में पन्नों की संख्या कम कर रही हैं। संवाद




शिक्षा का खर्च बढ़ गया
चोपड़ा गार्डन के नरेंद्र शर्मा ने कहा कि नए शिक्षा सत्र की शुरुआत के साथ किताबों और कॉपी-रजिस्टर पर होने वाला खर्च पहले की तुलना में काफी बढ़ गया है। पहले 80 रुपये में मिलने वाला रजिस्टर अब 100 रुपये तक पहुंच गया है। कई कंपनियां कीमत तो पहले जैसी रख रही हैं, लेकिन रजिस्टर में पन्नों की संख्या कम कर दी गई है। इससे अभिभावकों का मासिक बजट प्रभावित हो रहा है।

पांच वर्ष तक एक रहे सिलेबस
गांव पंजेटो का माजरा की मंजू रानी ने कहा कि सीबीएसई का पाठ्यक्रम कम से कम पांच वर्ष तक एक जैसा रहना चाहिए। कई निजी स्कूल हर कुछ वर्षों में किताबें और प्रकाशक बदल देते हैं, जिससे पुरानी पुस्तकें छोटे भाई-बहनों के काम नहीं आ पातीं। इससे हर साल नई किताबें खरीदनी पड़ती हैं और परिवार का खर्च बढ़ जाता है। एक ही पाठ्यक्रम लागू रहे तो आर्थिक राहत मिल सकती है।
विज्ञापन


किताबों ने बढ़ाया बोझ
गांव तेजली की सुमन रानी ने कहा कि पहले पहली कक्षा का निजी प्रकाशकों का पुस्तक सेट 1200 से 1500 रुपये तक मिल जाता था। अब कई स्कूलों में इसकी कीमत 1800 रुपये या उससे अधिक हो गई है। स्कूलों को बार-बार प्रकाशक और पुस्तकें बदलने से बचना चाहिए। यदि लंबे समय तक एक ही सिलेबस लागू रहें तो आर्थिक बोझ कम होगा और पुरानी किताबों का दोबारा उपयोग भी हो सकेगा।

मंजू रानी।

मंजू रानी।

मंजू रानी।

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें