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फसल के हिसाब से करें खेत की तैयारी : डॉ. रावल

Tue, 15 Oct 2024 04:30 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
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संवाद न्यूज एजेंसी
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यमुनानगर। चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय हिसार के स्थानीय कृषि विज्ञान केंद्र दामला की तरफ से सरस्वतीनगर में गेहूं में एकीकृत फसल प्रबंधन विषय पर एक दिवसीय किसान गोष्ठी का आयोजन किया गया। केवीके दामला के मुख्य समन्वयक डॉ. संदीप रावल ने किसानों को गेहूं में एकीकृत फसल प्रबंधन जैसे एकीकृत उर्वरक प्रबंधन, कीट व बीमारियों का प्रबंध, खरपतवार प्रबंधन आदि के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि किसानों को खेती करते समय फसल चक्र का विशेष ध्यान रखना चाहिए जिससे खेती पर अधिक खर्च करने से बचाव मिलेगा और बिना कुछ किए ही फसल चक्र के माध्यम से पारिस्थितिकी तंत्र में सहयोग व पर्यावरण के प्रति जागरूक होने का भी वरदान मिलेगा। फसल लगाते समय पूर्व में ही हमें यह निर्णय कर लेना चाहिए की कौन सी फसल हमें लगानी है।
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उसी हिसाब से खेत की तैयारी की जानी चाहिए तथा फसल के अवशेषों को खेत में ही मिलाने की योजना भी बना लेनी चाहिए जो मृदा को उर्वरक बनाए रखने में बहुत ही अहम भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि गेहूं में एकीकृत फसल प्रबंधन एक महत्वपूर्ण तकनीक है जो फसल की उत्पादकता, गुणवत्ता और पर्यावरण संरक्षण में सुधार करती है।
इसके मुख्य तत्वों में फसल चयन, भूमि तैयारी, खाद और उर्वरक का उपयोग, कीटनाशक प्रबंधन, पानी प्रबंधन, फसल चक्र और जैविक खाद शामिल है। कृषि विज्ञान केंद्र के मुख्य सलाहकार डॉ. नरेंद्र गोयल ने किसानों को फसल के अवशेषों को खेत में ही मिलाने की सलाह दी, जिससे मृदा की उर्वरा शक्ति बरकरार रहती है और रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता में कमी लाई जा सकती है।
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उन्होंने यह भी बताया कि खेत में गोबर की खाद डालने से पहले यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि गोबर पूर्णतः सड़ा-गला हो। प्रशिक्षण सहायक डॉ. करण सैनी ने एकीकृत सब्जी प्रबंधन के बारे में जोर देते हुए सब्जियों की जैविक खेती करने की सलाह दी। मौके पर सरस्वतीनगर के 30 प्रगतिशील किसान व महिला किसानों ने भाग लिया।
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