संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। डेंगू के खात्मे के लिए स्वास्थ्य विभाग ने तैयारी शुरू कर दी है। तालाबों में गंबूजिया मछली छोड़ी जा चुकी है। लोगों को जागरूक किया जा रहा है।
राष्ट्रीय डेंगू दिवस पर शुक्रववार को जिला सचिवालय में डीसी की अध्यक्षता में मलेरिया वर्किंग कमेटी की बैठक भी होगी। वहीं जिले में स्टाफ की कमी के चलते स्वास्थ्य विभाग को काफी मशक्कत करनी पड़ रही है।
हर साल मई तक स्वास्थ्य विभाग को स्प्रे गैंग की टीम मिल जाती थी। इस टीम में एक सुपरवाइजर व पांच वर्कर होते हैं। यह टीम दवा का छिड़काव करती है। अभी तक भी यह टीम मलेरिया विभाग को नहीं मिली है। जिले में मल्टीपर्पज हेल्थ वर्कर (एमपीएचडब्ल्यू) और मल्टीपर्पज हेल्थ सुपरवाइजर (एमपीएचएस) पद लंबे समय से खाली पड़े हैं। स्वास्थ्य विभाग के पास एमपीएचडब्ल्यू के कुल 123 पद स्वीकृत हैं। इनमें से 101 पद खाली हैं। इसी तरह एमपीएचएस के 25 में से 21 पद खाली हैं। एमपीएचएस में केवल चार कर्मचारी ही बचे हैं। एमपीएचडब्ल्यू और एमपीएचएस के ज्यादातर कर्मचारी अपने गृह जिलों में तबादला करवा कर लौट चुके हैं। एमपीएचडब्ल्यू फील्ड में रह कर डेंगू व मलेरिया से बचाव के लिए कार्य करते हैं। यहां तक की लोगों को जागरूक करना, चेकिंग व तालाबों में गंबूजिया मछली छोड़ने समेत अन्य कार्य इन्हीं को करना होता है। एमपीएचएस द्वारा एमपीएचडब्ल्यू के कार्य की निगरानी की जाती है।
2024 में जिले में डेंगू के 190 केस मिले थे। इससे पहले 2023 में 735 केस, 2022 में 932 केस मिले थे। इस साल डेंगू के दो केस कंफर्म हो चुके हैं। मलेरिया के भी दो केस मिल चुके हैं। अब तक 57 घरों में जांच के दौरान डेंगू का लारवा मिल चुका है, जिन्हें नोटिस थमाया गया है।
डेंगू व मलेरिया की रोकथाम के लिए 508 तालाबों में गंबूजिया मछली छोड़ी जा रही हैं। यह मछली तालाब में पनपने वाले मच्छर के लारवा को खा जाती हैं। रिक्त पद भरने के लिए मुख्यालय को अवगत कराया है। स्टाफ की कमी का असर काम पर पड़ रहा है। लोगों को मच्छर जनित बीमारियों की जानकारी देते हुए उन्हें सतर्कता बरतने को कहा जा रहा है। -डॉ. सुशीला सैनी, जिला मलेरिया अधिकारी।