यमुनानगर। लेबर कॉलोनी में ग्राउंड फ्लोर के क्वार्टरों के सामने वर्कशॉप रोड पर लगती सरकारी जमीन पर किए गए अवैध कब्जों के मामले में 28 जून को निगम ने करीब 15 क्वार्टर अलॉटियों को नोटिस देकर सात दिन में खुद कब्जे हटाने के आदेश दिए थे। नोटिस में दी चेतावनी मुताबिक सात दिन की अवधि पूरी होने पर नगर निगम को अवैध कब्जे हटाने की कार्रवाई करनी थी। लेकिन निगम ने जिन्हें नोटिस दिए थे उनमें कुछ लोग मामले को लेकर न्यायालय चले गए। इसके अलावा ये लोग एमएलए घनश्याम दास अरोड़ा से भी मिलने पहुंच गए। जिसके बाद मामले में नगर निगम अफसरों ने फिलहाल कार्रवाई करने से हाथ खींच लिए हैं।
इस मामले में जनवरी-2020 में नगर निगम कमिश्नर व सीएम विंडो पर लेबर कॉलोनी में फर्स्ट फ्लोर के क्वार्टरों में रह रहे लोगों ने शिकायत की थी। इनमें अरुण कुमार भी थे, जिन्होंने बताया कि लेबर कॉलोनी में 1997 में लोगों को क्वार्टर अलॉट हुए थे। तब उन्हें यहां फर्स्ट का क्वार्टर अलॉट हुआ था। अलॉटमेंट के समय सभी अलॉटियों ने शपथ पत्र दिया था कि उन्होंने यहां किसी तरह का अवैध कब्जा नहीं किया हुआ है और न भविष्य में अवैध कब्जा करेंगे। साथ ही एक शर्त यहां व्यवसायिक गतिविधि न करने की भी थी। लेकिन ग्राउंड फ्लोर के क्वार्टर जिन्हें अलॉट हुए, उनमें कइयों ने अपने सामने क्वार्टर से भी अधिक जगह पर कब्जे कर लिए। इन पर पक्के निर्माण हैं और व्यवसायिक गतिविधियां भी हो रही हैं। दो साल पहले नगर निगम ने इसे अपनी जमीन पर अवैध कब्जा माना था और नोटिस भी जारी किए थे।
तब से कार्रवाई नोटिस पर सिमटी है। अब भी 28 जून को जारी किए नोटिस में अवैध कब्जे खुद हटाने की मियाद पूरी होने पर नगर निगम ने कार्रवाई नहीं की। क्योंकि जिन्हें नोटिस मिले, उन्होंने विधायक से मिलकर कार्रवाई रुकवा दी। अरुण ने आरोप लगाया कि ये लोग विधायक को गुमराह कर अपना 50 साल पुराना कब्जा बता रहे हैं, क्योंकि क्वार्टर 1997 के अलॉट हैं। जिस स्कीम में यहां कब्जे की जमीन कलेक्टर रेट पर देने का विधायक भरोसा दे रहे हैं, वह स्कीम भी किरायेदारों के लिए हैं।
आरटीआई व सीएम विंडो में मिले जवाबों से खुला मामला
आरटीआई एक्टिविस्ट वरिंद्र सपरा ने बताया कि लेबर कॉलोनी में अवैध कब्जों का मामला उन्हें आरटीआई व सीएम विंडो में मिले जवाब से वर्ष-2020 में खुला। इस बारे दस्तावेज के आधार पर नगर निगम अफसरों को बताया कि जमीन नगर निगम की है। नगर निगम अफसर भी यहां जांच में सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे स्वीकार चुके हैं। इसके बाद भी दो साल से कार्रवाई नोटिसों में अटकी है। अब भी कोर्ट केस का हवाला देकर अफसर कार्रवाई टाल गए। इसका खामियाजा आम लोगों को भुगतना पड़ेगा।
जिन्हें नोटिस दिए थे, उनमें कुछ लोगों ने कोर्ट चले गए। कोर्ट की ओर से कहा गया है कि इनकी सुनवाई की जाए। अब नगर निगम कमिश्नर से इनकी सुनवाई की तारीख तय की जाएगी। सुनवाई के बाद ही कार्रवाई करने पर फैसला लेंगे।
रवि ओबरॉय, डीटीपी, नगर निगम।
लेबर कॉलोनी के वो लोग आए थे, जिन्हें निगम से नोटिस आए हैं। निगम अधिकारियों से बात की है कि अभी तुरंत कोई कार्रवाई न करें। इसका कोई समाधान ढूंढने का प्रयास करेंगे। सरकार ने निगम की जिन प्रॉपर्टी पर लोग किरायेदार के रूप में बैैठे थे, उनको कलेक्टर रेट पर बेचने का निर्णय लिया है। विधि विशेषज्ञों और सरकारी वकीलों से जानकारी लेंगे कि जिन्होंने कब्जा किया हुआ है, 50 साल तक कब्जा है। वहां पर शेड डाला हुआ या कंस्ट्रक्शन की हुई है तो क्या उन्हें स्कीम के अंदर ले सकते हैं या नहीं। यदि ले सकते होंगे तो जरूर सहयोग करेंगे।
-घनश्याम दास अरोड़ा, विधायक, यमुनानगर।