संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। 105 करोड़ रुपये की लागत से बने 200 बेड के जिला नागरिक अस्पताल की व्यवस्थाएं सवालों के घेरे में हैं। यहां से गर्भवती महिलाओं को डिलीवरी के लिए अपने से छोटे उप जिला नागरिक अस्पताल जगाधरी में रेफर किया जा रहा है। रात के समय यह कहकर लौटा दिया जाता है कि गायनी डॉक्टर उपलब्ध नहीं हैं।
हालात यह हैं कि जिस अवस्था में गर्भवती महिलाएं ठीक से चल भी नहीं पातीं, उन्हें रात के अंधेरे में जिला अस्पताल से तीन से चार किलोमीटर दूर जगाधरी अस्पताल भेजा जा रहा है। इस दौरान किसी भी तरह की लिखित रेफरल पर्ची नहीं दी जाती, जिससे रास्ते में किसी अनहोनी की स्थिति में जिम्मेदारी तय करना मुश्किल हो जाता है।
जिला नागरिक अस्पताल में तीन गायनी डॉक्टर तैनात हैं और उप जिला नागरिक अस्पताल जगाधरी में केवल एक गायनी डॉक्टर के सहारे प्रसव कराए जा रहे हैं। इसके बावजूद आंकड़े चौंकाने वाले हैं। जगाधरी अस्पताल में हर माह औसतन 450 से 500 डिलीवरी हो रही हैं। वहीं जिला अस्पताल में तीन डॉक्टर होने के बावजूद केवल करीब 150 डिलीवरी ही दर्ज की जा रही हैं। आरोप है कि रात में गर्भवतियों की देखभाल के दौरान परेशान न होना पड़े, इसलिए स्टाफ अपने स्तर पर ही उन्हें जगाधरी में भेज देते हैं।
स्वास्थ्य विभाग से जुड़े जानकारों का कहना है कि यदि जिला अस्पताल से छोटे अस्पताल में लिखित रेफर किया जाए तो प्रशासन पर कई तरह के सवाल खड़े हो सकते हैं। नियमों के अनुसार बड़े अस्पताल से छोटे अस्पताल में रेफर करना व्यवस्था की विफलता को दर्शाता है। यही वजह मानी जा रही है कि रेफर की प्रक्रिया को जानबूझकर मौखिक रखा जा रहा है, ताकि किसी तरह की जवाबदेही तय न हो सके।
यह मुद्दा पहले भी उठ चुका है। हाल ही में जिला अस्पताल में हुए प्रदर्शन के दौरान आशा वर्करों ने भी आरोप लगाए थे कि गर्भवती महिलाओं को बेवजह कभी जगाधरी तो कभी मुलाना रेफर किया जा रहा है। आशा वर्करों का कहना था कि इससे न केवल महिलाओं को शारीरिक परेशानी झेलनी पड़ती है, बल्कि उन्हें भी गर्भवतियों के साथ यहां वहां भागदौड़ करनी पड़ती है।
यदि जच्चा-बच्चा को कुछ हो जाए तो उनसे भी जवाब मांगा जाता है। एडवोकेट वरयाम सिंह का कहना है कि करोड़ों की लागत से बने जिला अस्पताल का उद्देश्य ही जिले की महिलाओं को बेहतर और सुरक्षित प्रसव सुविधा देना था। यदि वहां संसाधन और विशेषज्ञ मौजूद होने के बावजूद महिलाओं को इधर-उधर भटकाया जा रहा है, तो यह गंभीर लापरवाही है।
हमारे अस्पताल में हर माह 450 से 500 डिलीवरी हो रही हैं। रोजाना औसतन 10 महिलाओं की सिजेरियन डिलीवरी होती है। ऐसे में एक ही डॉक्टर प्रसव करवा रही है। कम डॉक्टरों व स्टाफ के बावजूद सबसे ज्यादा डिलीवरी करवा रहे हैं। - डॉ. अनुज मंगला, एमएस, उप जिला अस्पताल जगाधरी।
जिला नागरिक अस्पताल में अब तीन गायनी डॉक्टर हैं। स्टाफ रात में ड्यूटी से बचने के लिए अपने स्तर पर ही गर्भवतियों को जगाधरी भेज रहा है तो इसकी जांच करके कार्रवाई की जाएगी। किसी भी स्टाफ को ऐसा करने का अधिकार नहीं है। - डॉ. जितेंद्र सिंह, सिविल सर्जन, यमुनानगर।