संवाद न्यूज एजेंसी
जगाधरी। हनुमान गेट स्थित दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान आश्रम में रविवार को साप्ताहिक सत्संग करवाया गया।आशुतोष महाराज की शिष्या साध्वी मीना भारती ने ईश्वर की प्रार्थना व भक्ति का भाव समझाया। उन्होंने कहा कि जब हम गुरुदेव की आज्ञा पर भक्ति मार्ग पर निरंतर आगे बढ़ते रहने के प्रयासरत होते हैं, तब काल व माया का प्रभाव हमारा निरंतर बाधित करता है। लेकिन गुरु के चरणों में निरंतर प्रार्थना का भाव बने रहने से काल व माया का प्रभाव शून्य हो जाता है। तभी हम संसार में रहते हुए विषय वासनाओं से मुक्त होकर भक्तिमय जीवन जी सकते हैं।
साध्वी ने कहा कि ज्ञान मार्ग, वह मार्ग है, जिस पर मनुष्य अपनी मनमर्जी से नहीं अपितु पूर्ण सद्गुरु की कृपा से आगे बढ़ता है। ज्ञान व भक्ति का मार्ग मन व माया का मार्ग नहीं है। जब हम स्वयं के प्रयास से इस मार्ग पर आगे बढ़ने की कोशिश करते हैं, तब हमारा स्वयं का अहंकार ही बाधक बन जाता है। वहीं दूसरी ओर हम गुरु के चरणों में स्वयं के सभी भावों को समर्पित कर इस पर चलने का प्रयास करते हैं, तो रास्ते में आने वाली बाधाएं मंजिल का रास्ता दिखाती हैं।
उन्होेंने कहा कि गुरु चरणों में निरंतर प्रार्थना वह संबल है, जिसका सहारे हम अपना मानव जीवन सफल बना सकते हैं। हमें गुरु के चरणों में निरंतर यही प्रार्थना करनी चाहिए कि वे हमें ज्ञान का मार्ग दिखाएं। हम अपना मन, बुद्धि, अहंकार त्याग कर गुरु आज्ञा में निरंतर पथ पर आगे बढ़ते रहें और मानव जीवन को सफल कर पाएं। साध्वी ने कहा कि गुरु चरणों में बुद्धि की नहीं बल्कि मूर्खता की आवश्यकता होती है। जिसे गुरु की बातें समझ में आती है वह भौतिक मोह से दूर हो जाता है। जबकि सिद्ध होने लगता है और सांसारिक प्राणी उसे मूर्ख कहते हैं। उन्होंने कहा कि गुरु चरण में ध्यान लगाकर मनुष्य को मूर्ख बनकर ही ज्ञान की प्राप्ति हो सकती है। इस दौरान गुरु के भजनों पर श्रद्धालु जमकर थिरके।