कोर्ट में विचाराधीन यमुना नदी के साथ लगती शामलात भूमि पर जमना ऑटो कंपनी द्वारा कब्जा करने को लेकर शुक्रवार को हंगामा हो गया। कंपनी द्वारा कब्जा करने की सूचना दर्जनों किसान व ग्रामीण मौके पर पहुंच गए। यहां लोगों ने जमकर नारेबाजी की। लोगों ने कंपनी कर्मचारियों का विरोध किया। कंपनी प्रतिनिधियों ने बात करनी चाहि तो ग्रामीण भड़क गए। धीरे धीरे ग्रामीणों की संख्या बढ़ने लगी। जिसके बाद कंपनी के लोग काम छोड़कर फरार हो गए। गांव फैजपुर के पास स्थित जमीन पर कब्जा करने के लिए जमना ऑटो इंडस्ट्रीज की ओर से चारों ओर बाड़ लगाई जा रही थी। जैसे ही ग्रामीणों और किसानों की इसकी भनक पड़ी, दर्जनों लोग मौके पर पहुंच गए। लोगों के कड़े विरोध के बाद कंपनी प्रतिनिधियों को वहां से जाना पड़ा। करीब दो घंटे तनाव की स्थिति बनी रही। लोगों ने इसकी सूचना पुलिस सहित प्रशासनिक अधिकारियों को दी। लेकिन कोई मौके पर नहीं पहुंचा। जिसे लेकर ग्रामीणों में भारी रोष है।
कलेसर पंचायत के गांव फैजपुर के पास यमुना नदी के साथ लगती शामलात जमीन पर शुक्रवार को जमना ऑटो इंडस्ट्रीज के कुछ लोग कांटेंदार तारों की बाड़ लगवा रहे थे। इसकी सूचना ग्रामीणों को मिली तो वे भड़क गए। जिसके बाद दर्जनों की संख्या में ग्रामीण व किसान वहां पहुंच गए। लोगों ने पहुंचते ही काम कर रहे मजदूरों को रोक दिया। विरोध के कारण स्थिति तनावपूर्ण हो गई। सूचना पर सरपंच संगीता रानी व सरपंच प्रतिनिधि रविंद्र कुमार भी पहुंच गए। उन्होंने कंपनी को काम बंद करने के लिए कहा।
ग्रामीण जमील, राशिद, इकराम, नेकी, मुनशाद अली, सलामुद्दीन, ताका, कामिल, इरशाद, हाशिम, अब्दुल रहीम, दीन मोहम्मद कारी, इसराम, मनोहर माडू, मुर्सलीन, मोहम्मद अली, नूर मोहम्मद, हसन, सलीम, आलम, यासीन, तैयब, नौशाद, इमरान, कासिम, असलम, शमशाद, असलो, इस्लाम, मोहम्मद, जमशेद ने बताया कि जमीन की पैमाइश कराए जाने तक तार बाड़ नहीं करने दी जाएगी। उन्होंने बताया कि यह शामलात की भूमि है। जिसका केस डीसी की अदालत में चल रहा है। विचाराधीन भूमि पर कंपनी नाजायज तरीके से कब्जा करना चाहती है। जो ग्रामीण बिल्कुल नहीं होने देंगे।
जमना ऑटो कंपनी के कर्मचारी निसार खान ने बताया कि लगभग 20 दिन पहले जमीन की डिमार्केशन कराई गई थी। उस समय किसी ग्रामीण ने निशानदेही का कोई एतराज नहीं जताया था। ग्रामीणों की संतुष्टि के बाद ही तार बाड़ लगाने का कार्य शुरू किया। उन्होंने बताया कि यदि ग्रामीणों को निशानदेही को लेकर कोई एतराज है तो वह अपना संदेह दूर कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि फिलहाल काम रोक दिया गया है।
सरपंच प्रत्याशी जमील खान ने बताया कि कलेसर में लगभग 1490 एकड़ शामलात भूमि है। कलेसर पंचायत के साथ फैजपुर गांव भी लगता है। इसलिए इस जमीन पर दोनों गांव के लोगों का बराबर अधिकार है। लेकिन पंचायत ने अपने चहेतों को फायदा पहुंचाया। भेदभाव के चलते यह जमीन बेकार पड़ी है। यह जमीन हथनी कुंड मोड़ से लेकर नेशनल हाईवे के दोनों तरफ हिमाचल से सटे लालढांग तक पहुंच गई है। वहीं उत्तर प्रदेश के खारा पावर हॉउस पर खत्म होती है। लेकिन ग्राम पंचायत की नाकामी की वजह से करोड़ों रुपये की इस जमीन को मनमानी से बेचा जा रहा है। सरकार को इसकी जांच करानी चाहिए। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया की कंपनी द्वारा जमीन पर नाजायज कब्जा किया जा रहा है। इसकी शिकायत उन्होंने सरपंच कलेसर, वन विभाग कलेसर व अन्य अधिकारियों को दी लेकिन किसी ने भी मौका पर पहुंचने की जहमत तक नहीं उठाई।
शिकायतकर्ता जमील, इकराम व राशीद के अनुसार इस जमीन पर दोनों गांवों की बराबर हिस्सेदारी है, लेकिन प्रभावशाली लोगों द्वारा ग्रामीणों को दबाया जा रहा है। गांव के कुछ लोगों ने बिना अनुमति के अवैध तरीके से कंपनी केे जमीन बेच दी। ग्रामीणों की मांग है कि जबरन जमीन की हिस्सेदारी न हो। कोई व्यक्ति इस जमीन के साथ छेड़छाड़ न करें। उन्होंने सरकार से मांग की कि निष्पक्ष तरीके से इस जमीन के सभी दस्तावेजों की जांच की जाए।