किसान आंदोलन के समर्थन और कृषि कानून के विरोध में रविवार को विभिन्न सामाजिक संगठनों की ओर से एक विशाल रैली निकाली गई। जिसमें सैकड़ों वाहनों के साथ हजारों लोग शामिल हुए। रैली शहर की मुख्य सड़कों से होती हुई मिल्क माजरा टोल प्लाजा पर पहुंची। किसानों की समर्थन में निकाली गई रैली में हजारों की संख्या में लोग मौजूद रहे। सैकड़ों बाइक, कारें, टैक्टर रैली में शामिल रहे। इस दौरान लोगों ने किसानों के समर्थन और सरकार के खिलाफ जमकर बाजी की।
रैली के लिए सुबह 11 बजे लोग लघुसचिवालय के सामने अनाज मंडी में जमा होने शुरू होने लगे। रैली सामाजिक संगठन खुशी उन्नति केंद्र के बैनर तले निकाली गई। अनाजमंडी में सुबह ही सैकड़ों कार, बाइक व टैक्टर लेकर लोग पहुंच गए। कृषि कानूनों के विरोध में कार व ट्रैक्टरों की रैली अनाज मंडी गेट से शुरू होकर भाई कन्हैया साहिब चौक, मॉडल टाउन, प्यारा चौक, मधु चौक, ईएसआई चौक होते हुए अग्रसेन चौक पहुंची। यहां से रैली मिल्क माजरा टोल रवाना हुई। रैली में युवाओं, महिलाओं, व्यापारियों, वकीलों, अध्यापकों व मजदूर सभी लोग शामिल रहे। करीब चार किलोमीटर लंबी रैली शहर की सड़कों के बीच से गुजरी तो लोग इसका समर्थन करते हुए नजर आए।
खुशी उन्नति केंद्र अध्यक्ष गौरव चौधरी ने कहा कि केंद्र सरकार ने जो तीन कृषि कानून बनाए गए हैं, ये हर प्रकार से किसान, व्यापारी व आमजन के विरोधी हैं। इन कानून से न सिर्फ किसान को नुकसान होगा, बल्कि व्यापारियों व आमजन को भारी नुकसान का सामना करना पड़ेगा। युवाओं में बेरोजगारी बढ़ेगी और व्यापारियों का व्यापार भी प्रभावित होगा। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि भाजपा अपनी हठधर्मिता छोड़कर उन किसानों के बारे में भी सोचे जो 29 दिनों से कड़कड़ाती ठंड में सड़कों पर पड़े हुए हैं। केंद्र सरकार को चाहिए कि वे तुरंत इन कानून को वापिस लेकर किसानों को घर लौटाए। समाजसेवी संजय कुमार ने कहा कि किसानों को इन कानून में संशोधन मंजूर नहीं है चूंकि इससे किसान और कृषि दोनों ही समाप्त हो जाएंगे। यह सभी कानून किसानी के विरूद्ध हैं व किसानों की जमीनों को बिकवाने वाले कानून हैं। सरकार को इन कानून में संसोधन की बजाए इन्हें निरस्त करना चाहिए। सुनील श्योराण ने कहा कि मोदी जी अपने मन की बात कर रहे हैं। लेकिन लाखों किसान बॉर्डर पर अपने मन की बात बता रहे हैं। मोदी को अपनी बात कहने की बजाए किसानों के मन की बात सुननी चाहिए। इसलिए अब देशवासी प्रधानमंत्री की मन की बात नहीं सुनेंगे। प्रधानमंत्री की मन की बात के समय रैली में लोनों ने वाहनों के हॉर्न बजाकर इसका विरोध किया। उन्होंने कहा कि जब तक कानून रद्द नहीं होगें, विरोध जारी रहेगा।