कृषि कानूनों को रद्द करने के लिए गतिरोध बढ़ता जा रहा है। जिसके चलते किसान संगठनों के आह्वान पर शुरू हुआ तीन दिवसीय टोल फ्री आंदोलन बढ़ाकर अनिश्चितकालीन कर दिया गया है। किसान संगठनों के आह्वान पर रविवार को जिला पदाधिकारियों ने इसकी घोषणा की। वहीं मिल्क माजरा टोल प्लाजा पर रविवार को किसानों ने थाली व ताली पीटकर प्रधानमंत्री की मन की बात का विरोध किया। जितनी देर पीएम की मन की बात चली उतनी देर किसानों ने थालियां व तालियां बजाकर इसका विरोध किया। इस दौरान किसानों ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। किसान संगठनों के आह्वान पर ग्रामीण क्षेत्रों में पीएम की मन की बात का पुरजोर विरोध किया गया।
किसान संगठनों ने 25 दिसंबर से 27 दिसंबर तक टोल फ्री आंदोलन का आह्वान किया था। जिसके तहत रविवार को यह आंदोलन पूरा होना था। लेकिन अब इसे बढ़ाकर अनिश्चितकालीन कर दिया गया है। इस बारे भाकियू जिलाध्यक्ष सुभाष गुर्जर ने कहा कि उच्च नेतृत्व के आदेशों पर यह आंदोलन अनिश्चितकालीन कर दिया गया है। जब तक सरकार कानून वापिस नहीं ले लेती तब तक आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री आत्ममुग्धता से ग्रस्ति हैं। वे केवल अपने मन की बात करते हैं, लेकिन सुनते किसी की नहीं है। यही कारण है कि तीनों कानून बनाकर किसानों का देथ वारंट लिख दिया है। जिस कृषि को वे देश की सबसे बड़ी और पहली अर्थव्यवस्था बता रहे हैं, उसे ही वे नष्ट करने पर उतारू हैं। उनका यह दोहरा चरित्र जनता के सामने आ गया है। किसानों ने ही नहीं कामगारों, मजदूरों, कर्मचारी, नौकरशाह, व्यापारी, रेहड़ी फड़ी वालों ने भी थालियां बजाकर इसका विरोध किया है।
प्रधानमंत्री की मन की बात सुबह अपने निर्धारित समय पर शुरू हो गई थी। किसान संगठनों ने इसके विरोध का आह्वान किया था। जिसके चलते मिल्क माजरा टोल प्लाजा पर सैकड़ों किसानों ने रात को ही इसकी तैयारी कर ली थी। सुबह जब प्रधानमंत्री ने अपना संबोधन शुरू किया किसानों ने थाली बजाना शुरू कर दिया। वहीं लोगों ने तालियां बजाकर इसका विरोध किया। प्रधानमंत्री की बात 20 मिनट तक चली और किसानों ने बीस मिनट तक लगातार थालियां बजाकर इसका विरोध किया।
इस दौरान भारतीय किसान यूनियन निदेशक मनदीप रोडछप्पर ने कहा कि सरकार अपनी जिद्द पर अड़ी हुई है। यह सब पूंजीपतियों को लाभ पहुंचाने के लिए किया जा रहा है। लेकिन किसान अपने वजूद और हक की लड़ाई लड़ेंगे। उन्होंने कहा कि किसानों को दिल्ली में आंदोलन करते हुए एक महीने से ज्यादा समय हो गया है।
सरकार द्वारा बनाए गए कृषि कानूनों का देश के लाखों किसान दिल्ली सीमा पर कड़ाके की ठंड में पिछले एक महीने से विरोध कर रहें है। इस दौरान 25 से अधिक किसान शहीद हो चुके है। लेकिन भाजपा सरकार सोई हुई है। जिसे किसानों के हितों की कोई परवाह नहीं है। भाजपा किसान विरोधी सरकार है। जो पूंजीपतियों के हितों को ध्यान में रखकर कानून बना रहीं है। इससे देश का किंसान बर्बाद होगा।