भारतीय किसान यूनियन की ओर से अपनी मांगों को लेकर वीरवार 26 नवंबर को दिल्ली कूच किये जाने की घोषणा को लेकर पुलिस व प्रशासन दिनभर सक्रिय रहा। किसानों को दिल्ली कूच करने से रोकने के लिए पुलिस की ओर से कस्तूरबा आश्रम चौक, त्रिवेणी चौक, सांगीपुर नाके, गांव बापा व सढूरा, झीवरेहड़ी, जमालपुर व गुमथला में नाके लगाए गए थे। जिन पर पुलिस के कर्मचारी भारी संख्या में तैनात रहे, लेकिन क्षेत्र के किसान पुलिस को चकमा देकर दूसरे रास्तों से दिल्ली कूच के लिए रवाना हो गए। लेकिन पुलिस को इसकी भनक तक नहीं लगी। क्षेत्र के किसान दिल्ली कूच को लेकर काफी संख्या में जीटी रोड से गुजर रहें किसानों के काफिलें में जाकर शामिल हुए। जिसका नेतृत्व भाकियू प्रदेशाध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी कर रहे थे। पुलिस अधिकारी दिनभर रादौर क्षेत्र में गश्त करके किसानों की गतिविधियों पर नजर गड़ाए रहें। लेकिन रादौर क्षेत्र में कही भी किसान सड़कों पर दिल्ली कूच के लिए रवाना होते नजर नहीें आये। उधर पुलिस ने दिल्ली कूच को लेकर भाकियू ब्लॉक उपप्रधान सीटू नंबरदार को रादौर के एक बैंक मेें जाते गिरफतार किया। जिसे तहसीलदार के समक्ष पेश किया गया। जमानत न मिलने पर किसान नेता सीटू नंबरदार को पुलिस ने जेल भेज दिया। जिसे अब 27 नवंबर को तहसीलदार के समक्ष पेश किया जायेगा।वहीं पुलिस ने किसान नेता नाथीराम निवासी दौहली को भी गांव से गिरफतार किया था। लेकिन नाथीराम की तबीयत खराब होने के बाद उसे पुलिस ने वापिस गांव भेज दिया। लेकिन एतियात के तौर पर पुलिस का एक कर्मचारी किसान नेता नाथीरा दौहली निवास पर तैनात किया गया है। पुलिस दो दिनों से किसान नेताओं व कार्यकर्ताओं की धरपकड़ को लेकर उनके गांवों में छापे मार रहीं है। लेकिन इक्का-दुक्का किसान नेताओं को छोडकर अधिकतर किसान नेता पुलिस को चकमा देकर दिल्ली कूच करने में कामयाब हो गए। पुलिस को अब ढूढने पर भी कोई किसान नेता व कार्यकर्ता नजर नहीं आ रहा है।