संवाद न्यूज एजेंसी
जगाधरी। बच्चों को शिक्षा का अधिकार (आरटीई) से वंचित करने के लिए आरटीई की सीटों का सही ब्योरा न देने वाले 25 निजी स्कूलों के एमआईएस पोर्टल विभाग ने बंद कर दिए हैं। इससे स्कूलों की मान्यता संकट में है।
आरटीई में निजी स्कूलों में 25 प्रतिशत सीटें आर्थिक कमजोर व वंचित वर्ग के बच्चों के लिए आरक्षित रखने का कानून है। विभाग की सूची के अनुसार जिले में कुल 340 निजी स्कूल हैं, जिसमें से 315 स्कूलों ने अपनी सीटों का ब्योरा समय पर साझा कर दिया था। वहीं 25 स्कूल ऐसे हैं, जिन्होंने 20 मार्च तक मांगी जानकारी नहीं दी। विभाग ने स्पष्ट किया है कि इन स्कूलों को अंतिम अवसर देते हुए 16 अप्रैल तक ऑनलाइन आवेदन पोर्टल पर सीटों का पूरा विवरण अपलोड करना अनिवार्य दिया है।
अधिकारियों का कहना है कि यदि निर्धारित समय सीमा तक जानकारी उपलब्ध नहीं करवाई तो संबंधित स्कूलों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इसमें मान्यता रद्द करने से लेकर आर्थिक दंड तक के प्रावधान शामिल हैं। विभाग ने यह भी साफ किया है कि आरटीई के तहत दाखिले की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी रखी जाएगी और किसी भी प्रकार की अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
इस दौरान कुछ स्कूलों ने जानबूझकर सीटों की जानकारी छिपाई है, ताकि आरटीई के तहत दाखिले से बचा जा सके। ऐसे स्कूलों को पहले भी नोटिस जारी किए जा चुके हैं, लेकिन सुधार न होने पर अब सख्त रुख अपनाया गया है। वहीं, कई अभिभावकों ने भी शिकायत की है कि उन्हें आवेदन के दौरान स्कूलों की सीटों की जानकारी नहीं मिल रही, जिससे उनके बच्चे अधिकार से वंचित हैं।
पोर्टल की मॉनिटरिंग हो रही : अशोक
जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी अशोक राणा ने बताया कि आरटीई के तहत आर्थिक कमजोर और वंचित वर्ग के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध करवाना इस कानून की प्राथमिकता है। इसके लिए सभी निजी स्कूलों को नियमों का पालन करना अनिवार्य है। विभाग लगातार पोर्टल की मॉनिटरिंग कर रहा है और नियमों की अनदेखी करने वालों पर नजर रखी जा रही है। उन्होंने अभिभावकों से भी अपील की है कि वे समय रहते अपने बच्चों के लिए ऑनलाइन आवेदन करें और किसी भी प्रकार की समस्या होने पर विभाग से संपर्क करें।