हरियाणा अध्यापक पात्रता परीक्षा में कितने परीक्षार्थी पास हो पाएंगे यह
तो दो माह बाद रिजल्ट आने पर पता चलेगा। प्रशासन की ओर से परीक्षा के संबंध
में प्रबंधों के दावे की पोल परीक्षा खत्म होने के बाद ही खुल गई। दोपहर
को एक बजे जैसे ही एचटेट परीक्षा खत्म हुई तो चारों तरफ जाम की स्थिति बन
गई।
शहर के जिस एरिया स्थित स्कूल या कॉलेज को परीक्षा केंद्र बनाया गया था
वहां पर वाहनों की कतारें लग गईं। इससे परीक्षार्थियों के साथ शहरवासियों
को दो घंटे जाम के कारण परेशानी का सामना करना पड़ा। जाम खुलवाने के पुलिस
के सभी इंतजाम बौने साबित हुए। अगर शनिवार की बदइंतजामी से प्रशासन ने सबक
नहीं लिया तो रविवार को हालात ज्यादा खराब हो सकते हैं। क्योंकि रविवार को
दो शिफ्टों में पेपर होना है और परीक्षार्थी भी आठ हजार के बजाय 15 हजार के
करीब होंगे। पहली शिफ्ट में रविवार को 7750 और दूसरी शिफ्ट में 11770
परीक्षार्थी बैठेंगे।
आज हालात ज्यादा हो सकते हैं खराब
शनिवार
के बदइंतजामों से अगर प्रशासन सबक नहीं लेता है तो रविवार को हालात ज्यादा
खराब हो सकते हैं। क्योंकि रविवार का दिन होने से पहले ही शहर में ट्रैफिक
ज्यादा रहता है। इसके बाद दूसरी शिफ्ट में होने वाला पेपर शाम साढ़े पांच
बजे खत्म होगा। इससे जाम की दिक्कत आना तय है। ज्यादातर शहरवासी शाम को
बाजार में खरीदारी करने निकलते हैं। रविवार को भी शनिवार जैसे प्रबंधों के
सहारे प्रशासन ने ट्रैफिक को कंट्रोल किया तो कई घंटे तक जाम की स्थिति बन
सकती है।
कोई खफा तो कई खुश
पानीपत निवासी रेनू बाला अपने पिता
के साथ कार से पेपर देने के आ रही थी तो रादौर में उनकी गाड़ी का एक्सीडेंट
हो गया। इसमें रेनू और उनके पिता मुकेश को हल्की चोटें आईं। इस वजह से वह
परीक्षा में 35 मिनट देर से पहुंचीं। लेकिन अधिकारियों ने उसे परीक्षा में
बैठने दिया, वहीं कैथल के कलायत से आए मुकेश ने बताया कि डीएवी गर्ल्स
कॉलेज में बने परीक्षा केंद्र पर तैनात अधिकारियों रवैया परीक्षार्थियों के
प्रति सही नहीं था। सुबह पांच बजे घर से चला तब जाकर समय पर परीक्षा
केंद्र पहुंच पाया। जैसे ही केंद्र में एंट्री करने लगे तो एक अधिकारी ने
शॉल को लेकर उसे भलाबुरा कहना शुरू कर दिया। सतीश कुमार का कहना था कि तीन
घंटे के सफर के बाद सेंटर पर पहुंचे थे, केंद्र में पांच मिनट पहले ही
एंट्री कराई गई, उन्हें शौचालय में जाने के लिए भी समय नहीं दिया गया।
यहां पर हुई चूक
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प्रशासन ने थापर ग्राउंड और सिटी पैलेस में पार्किंग बनाने की बात कही थी।
लेकिन वहां पर बहुत कम गाड़ियों की पार्किंग की गई थी, अन्य सैकड़ों
गाड़ियाें ऐसे ही सड़क किनारे पार्किंग की हुई थी। सभी गाड़ियों को
पार्किंग में खड़ा कर सड़क पर ज्यादा भीड़ जमा होने से रोका जा सकता था।
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दूसरी चूक ऑटो चालकों के जमावड़े को न हटाने की हुई। हर चौक पर सवारियों
को लेेने के लिए ऑटो चालकों का जमावड़ा जाम की बड़ी वजह बनी रहा।
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तीसरा कारण रेलवे रोड पर मधु चौक से फव्वारा चौक और फव्वारा चौक से कमानी
चौक पर कई जगह दुकानदारों ने अतिक्रमण किया हुआ था। इस कारण वाहन जाम में
फंसे रहे।
- चौथा कारण ट्रैफिक कर्मी की कम मौजूदगी। परीक्षा खत्म
होने पर हालात ऐसे बन गए थे कि चौक पर स्थित पुलिस कर्मचारियों को समझ में
नहीं आया कि कहां से वाहनों को निकाला जाए।
और निशक्त को तीसरी मंजिल पर देनी पड़ी परीक्षा
यमुनानगर।
निशक्त के लिए एचटेट बेहद दिक्कतों भरा रहा। न तो शिक्षा बोर्ड की ओर से
इनके लिए केंद्र पर कोई विशेष प्रबंध किए गए थे और न ही जिला प्रशासन ने।
पेपर देने पहुंचे निशक्तों को प्रशासन की गलत व्यवस्था से जूझना पड़ा। जींद
के सुनील कुमार ने बताया कि वह पोलियो ग्रस्त हैं और दोनों पैर सही न होने
से स्टिक के सहारे ही चल पाता है। उनका सेंटर डीएवी गर्ल्स कॉलेज में
बनाया गया था, जहां तीसरी मंजिल पर उसका कमरा था। उसने बताया कि साथ आए
दोस्त को केंद्र में नहीं जाने देने से वह बेहद मुश्किलों से कमरे तक पहुंच
पाया।