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ओवरलोडिंग वाहनों क चेकिंग में पुलिसकर्मी भी होंगे शामिल

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गत माह अमादलपुर के पास हुए हादसे के बाद जिले की सड़कों पर ओवरलोड वाहनों की चेकिंग अब पुलिस के जवानों के साथ होगी। अभी तक जिला ट्रांसपोर्ट अधिकारी की टीम कार्यालय के ही स्टॉफ को लेकर चेकिंग पर जाती थी। कम से कम 10 पुलिसकर्मी उपलब्ध कराने के लिए डीटीओ ने सरकार को पत्र लिखा है। अधिकारियों का तर्क है कि पुलिस के साथ होने से ओवरलोड वाहनों पर शिकंजा ज्यादा कसा जाएगा। वहीं, इससे लोगों को भी राहत मिलेगी। क्योंकि रोजाना चेकिंग व वाहन पकड़े जाने के बाद भी ओवरलोड रुकने का नाम नहीं ले रहा है।
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मार्च माह में जब जिला ट्रांसपोर्ट अधिकारी की टीम वाहनों की चेकिंग के लिए गई थी तो रेत से भरे एक ओवरलोड ट्रक को पकड़ा गया था। टीम में कार्यालय का कंप्यूटर ऑपरेटर भी था। टीम ने ऑपरेटर को ट्रक में बिठा दिया था। परंतु रास्ते में ट्रक अनियंत्रित होकर सड़क किनारे खड़े पेड़ से टकरा गया। हादसे के बाद ट्रक में आग लग गई। इस दुर्घटना में ट्रक के क्लीनर व डीटीओ के कंप्यूटर ऑपरेटर की मौत हो गई थी। जिसके बाद से डीटीओ अपने कार्यालय के स्टॉफ को चेकिंग पर ले जाने से बच रहे हैं।
डीटीओ की दो टीमें ओवरलोड वाहनों की जांच के लिए सड़क पर रहती हैं। एक टीम दिन में व दूसरी रातभर सड़कों पर चेकिंग करती है। परंतु कई बार विभाग की चेकिंग टीम का विरोध भी हो चुका है। कुछ दिन पहले ही शुगर मिल के पास पुराना नेशनल हाईवे पर ट्रक चालकों ने डीटीओ की टीम की कार्रवाई का विरोध करते हुए जाम लगा दिया था। सड़कों पर वाहनों को रोक दिया था। वाहन चालकों ने आरोप लगाया था कि चेकिंग के नाम पर उन्हें परेशान किया जाता है। ऐसे में जब टीम के साथ कई पुलिसकर्मी होंगे तो निश्चित ही ऐसी घटनाओं पर अंकुश लगेगा। दोनों टीमों द्वारा हर माह 400 से 450 ओवरलोड वाहन सड़कों पर पकड़े जाते हैं। इनमें ज्यादातर खनन सामग्री व लकड़ी से भरे वाहन होते हैं।
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डीटीओ डॉ. सुभाष चंद्र ने बताया ओवरलोड वाहनों की चेकिंग के लिए 10 पुलिसकर्मियों का स्टॉफ मांगा है। पुलिस के होने से टीम सुरक्षित भी महसूस करेगी। उम्मीद है जल्द ही पुलिसकर्मी मिल जाएंगे।
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