यमुनानगर। हरियाणा राज्य महिला आयोग की चेयरपर्सन रेनू भाटिया मंगलवार को वन स्टॉप सेंटर का निरीक्षण करने पहुंची। उन्होंने सेंटर के रजिस्टर में रिकॉर्ड की जांच की। सेंटर में रहने के बाद लड़कियों को जिन पुलिसकर्मियों के सुपुर्द किया गया था, रेनू भाटिया ने उनके मोबाइल पर अपने नंबर से फोन किया। परंतु कई-कई बार फोन करने के बाद भी किसी ने उनकी कॉल को रिसीव नहीं किया।
एक सब इंस्पेक्टर ने फोन उठाया तो उन्हें यह तक पता नहीं था कि पांच माह पहले वह वन स्टाॅप सेंटर से जिस 22 वर्षीय लड़की को लेकर गया था उसे आगे किसे हैंडओवर किया। सब इंस्पेक्टर कभी बालकुंज भेजने की बात कहता तो कभी कुछ और कहता। चेयरपर्सन ने संबंधित थाने से इसका रिकॉर्ड मांगा।
आयोग की चेयरपर्सन रेनू भाटिया के अनुसार वन स्टाॅप सेंटर में जिन लड़कियों को रखा जाता है उनका नियमित फॉलोअप नहीं किया जा रहा। उन्होंने केवल पांच मामलों की जांच की, लेकिन किसी का भी फॉलोअप नहीं किया गया।
यह भी पता करने की कोशिश नहीं की गई कि सेंटर से जाने के बाद उन लड़कियों की हालत क्या है। वह ठीक हैं या फिर उनके साथ घर में कोई मारपीट एवं अत्याचार हो रहा है। इसे लेकर उन्होंने वन स्टॉप सेंटर चला रहे अधिकारियों को सख्त चेतावनी दी।
उन्होंने कहा कि केवल नंबर बढ़ाने से कुछ नहीं होगा। हमें यह नहीं देखना है कि कितनी महिलाओं या लड़कियों ने इस सेंटर का फायदा उठाया है। हमें उनका फॉलोअप करने की जरूरत है। खासकर घरेलू हिंसा व दहेज प्रताड़ना के केस में कम से कम तीन महीने तक फॉलोअप लिया जाए। पीड़िताओं को अपना फोन नंबर भी दें ताकि वे अपनी बात उन्हें बता सकें।
आज के बाद कोई ऐसा केस नहीं होना चाहिए जिसका फॉलोअप न किया गया। इसका जिक्र रेनू भाटिया ने विजिटर बुक में की गई अपनी टिप्पणी में भी किया। टिप्पणी के दौरान उन्होंने भविष्य के लिए चेतावनी भी दी। वहीं पुलिसकर्मियों द्वारा फोन नहीं उठाने पर सामने कुर्सी पर बैठीं एक अधिकारी ने तर्क दिया कि हो सकता है कि पुलिसकर्मी कोर्ट में गया हो। इस पर चेयरपर्सन ने उनसे कहा कि आपके पास तो सारे तर्क हैं। मौके पर महिला एवं बाल विकास विभाग की डीपीओ तरविंद्र कौर, सीडीपीओ एवं वन स्टॉप सेंटर की नोडल ऑफिसर किरन, वन स्टॉप सेंटर की इंचार्ज बिंदू रिशी, एएसआई मुकेश कुमार, बाल विवाह निषेध अधिकारी अरविंद्र कौर मौजूद रहीं।