जगाधरी। इंटरनेट और ऑनलाइन कार्यप्रणाली ने लोगों को जितनी सुविधा दी है, वहीं उतनी ही परेशानियां भी बढ़ा दी हैं। इंटरनेट के बढ़ते चलन में साइबर क्राइम भी बढ़ते जा रहे हैं। इससे जिला भी अछूता नहीं है। ऐसा कोई दिन नहीं होता जब किसी से ऑनलाइन ठगी न होती हो। हालांकि पुलिस इसमें कार्रवाई तो करती है लेकिन इस पर पूरी तरह रोक नहीं लग पा रही है। ऐसे में पुलिस ने साइबर क्राइम पर अंकुश लगाने के लिए लोगों को जागरूक करने की मुहिम शुरू की है। ऐसे अपराधों के लिए पुलिस ने अलग से विंग बनाई है।
पुलिस की यह विंग केवल साइबर क्राइम संबंधी मामलों की ही छानबीन व कार्रवाई करती है। वहीं साइबर क्राइम के प्रति लोगों को शिविर लगाकर जागरूक किया जा रहा है। इसके अंतर्गत सबसे पहले स्कूल, कॉलेज को कवर किया जा रहा है। पुलिस स्कूल कॉलेज में पहुंचकर विद्यार्थियों व स्टाफ सदस्यों को साइबर क्राइम का शिकार होने से बचने के तरीके बता रही है। वहीं इसी कड़ी में पुलिस ने अब किसानों को जागरूक करना शुरू कर दिया है। साइबर सेल की ओर से अनाजमंडी में किसानों को साइबर ठगी से बचने के तरीके बता रही है। चूंकि किसानों के तमाम कार्य अब ऑनलाइन हो गए हैं, जबकि अधिकांश किसान ऐसे हैं, जिन्हें इंटरनेट, विभाग पोर्टल, यूपीआई इत्यादि के बारे में पूरी जानकारी नहीं है। सरकार की ओर से किसानों को पेमेंट भी ऑनलाइन की जा रही है। जिसके चलते पुलिस किसानों को बचाव के तरीके बता रही है।
एसपी मोहित हांडा ने इसके लिए छह टीमों का गठन किया है। यह टीमें लोगों के बीच जा रही है और उन्हें जागरूक कर रही है। टीम ने इसके लिए रामलीला में आए लोगों को भी इसमें शामिल किया। साइबर क्राइम टीम प्रभारी नसीब सिंह ने बताया कि रामलीला में काफी संख्या में लोग पहुंचते हैं। ऐसे में लोगों को यहां पर जागरूक करना आसान रहा। रामलीला पंडाल में पहुंचकर टीम सदस्यों ने लोगों को साइबर क्राइम के तरीके व इससे बचाव के तरीके बताए।
साल में 250 से ज्यादा साइबर ठगी के मामले
बता दें कि स्मार्ट फोन के प्रयोग ने साइबर ठगी को बहुत बढ़ावा दिया है। सबसे ज्यादा लोगों को स्मार्ट फोन के जरिए ही ठगी का शिकार बनाया जा रहा है। पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक एक साल में करीब 250 साइबर क्राइम के मामले सामने आ रहे हैं। यह वह मामले हैं, जिनकी शिकायत होती है। जबकि कई मामले ऐसे भी हैं जिनमें लोग शिकायत नहीं करते हैं। साइबर ठगी को लोगों की जागरूकता से ही रोका जा सकता है।
किसी को न दें ओटीपी और पासवर्ड
प्रभारी नसीब सिंह ने कहा कि साइबर ठगी से बचाव का सबसे पहला कार्य सिक्योरिटी है। लोगों को अपने स्मार्ट फोन में लॉक लगाकर रखना चाहिए। इसमें एक से अधिक पैटर्न और लॉक होने चाहिए। यूपीआई एप व नेट बैंकिंग एप पर सबसे अलग पैटर्न व लॉक होना चाहिए। यह लॉक किसी को नहीं बताना चाहिए। वहीं अपना ओटीपी व पासवर्ड किसी से शेयर नहीं करना चाहिए। साइबर ठगी की शिकायत के लिए हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दें।