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गुरुद्वारे के बाहर पुलिस बल तैनात

Fri, 08 Aug 2014 01:16 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/यमुनानगर
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यमुनानगर। एतिहासिक गुरुद्वारा नौवी पातशाही झींवरेहड़ी साहिब में एचएसजीएमसी का कब्जा बरकरार है। एचएसजीएमसी पदाधिकारियाें और समर्थकों ने वीरवार को गुरुद्वारा साहिब की साफ-सफाई की और लंगर तैयार करवाया। इस दौरान सुरक्षा के मद्देनजर गुरुद्वारे के बाहर पुलिस बल डटा हुआ है। इस दौरान एचएसजीएमसी के जनरल सेक्रेटरी जोगा सिंह ने गुरुद्वारा परिसर में वीरवार को सभी सदस्यों की बैठक ली। उन्होंने गुरुद्वारे में तैनात कर्मचारियों को गुरुद्वारे की सेवा करते रहने को कहा।
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जानकारी के अनुसार स्थानीय संगत गुरुद्वारे में माथा टेकने पहुंच रही है। हालांकि पुलिस बल पूरी मुस्तैदी से यहां डटा हुआ है और गुरुद्वारे का मुख्य गेट बंद करवाया हुआ है। वीरवार को गुरुद्वारे के बाहर एसजीपीसी समर्थक नदारद रहे।  गुरुद्वारे के बाहर से एसजीपीसी समर्थकों के हट जाने से पुलिस प्रशासन भी चैन की सांस ले रहा है। गुरुद्वारे में एचएसजीएमसी के जनरल सेक्रेटरी जोगा सिंह के अलावा जिला प्रधान सुखविंद्र सिंह, जिला प्रेस सचिव कुलवंत सिंह, रादौर ब्लाक प्रधान गुरबाज सिंह, जगतार सिंह, जगजीत सिंह, कुलवंत सिंह, मनमोहन सिंह, सर्वजीत सिंह, हरपाल सिंह, मलविंद्र सिंह, अमरजीत सिंह, अरिंद्र पाल सिंह, मुख्तयार सिंह, मेजर सिंह, विक्रम सिंह, जितेंद्र सिंह, बलजीत सिंह और बलविंद्र सिंह सहित अन्य एचएसजीएमसी समर्थक मौजूद हैं।

उधर, एसजीपीसी समर्थक फिलहाल इस कब्जे का विरोध करने के मूड में नहीं है। एसजीपीसी सदस्य बलदेव सिंह कायमपुर ने कहा कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की ओर से दिए गए आदेशों का पूरी तरह अध्ययन करने के बाद ही अगली कार्रवाई की जाएगी। गौरतलब है कि बुधवार को एचएसजीएमसी के रादौर प्रधान गुरबाज सिंह के नेतृत्व में बड़ी संख्या में अलग कमेटी समर्थकों ने एतिहासिक गुरुद्वारा नौवी पातशाही झींवरेहड़ी साहिब में कब्जा कर लिया था। इसके बाद गुरुद्वारे की लोकल कमेटी के प्रधान और अन्य सदस्यों को पुलिस ने सुरक्षा कारणों से गुरुद्वारे के भीतर नहीं जाने दिया। एसजीपीसी की ओर से पुलिस को गुरुद्वारे पर अवैध रूप से कब्जा करने की शिकायत दी गई थी। गुरुद्वारा नौवी पातशाही झींवरेहड़ी साहिब गुरुद्वारा एक्ट 1925 के सेक्शन 87 के तहत आता है। प्रदेश में इस सेक्शन के तहत कुल 17 गुरुद्वारे एसजीपीसी के अधीन है। इन गुरुद्वारों का प्रबंध लोकल कमेटियोें के हाथ में हैं और गुरुद्वारों में लोकल कर्मचारी ही नियुक्त हैं।
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