सरकारी अस्पताल अंटावा में स्टाफ उपलब्ध न होने पर नारेबाजी करते ग्रामीण।
- फोटो : YAMUNA NAGAR
गांव अंटावा में सरकार द्वारा दो एकड़ पंचायती भूमि पर लगभग साढ़े तीन करोड़ रुपये की लागत से प्राइमरी हेल्थ सेंटर बनाया गया है। हेल्थ सेंटर का लगभग तीन महीने पहले मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने चंडीगढ़ से उद्घाटन किया था। लेकिन कई महीने बीत जाने के बावजूद आज तक अस्पताल में लोगों को स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध नहीं हो पाई है।
अस्पताल में इलाज की सुविधा न मिलने पर बुधवार को लोगों ने सरपंच अंटावा के पिता भगवानदास, पूर्व सरपंच रोशनलाल बावा के नेतृत्व में स्वास्थ्य विभाग के विरुद्ध जमकर नारेबाजी की। पूर्व सरपंच रोशनलाल, भगवानदास, सुशील, लीजाराम, महेन्द्रसिंह, रणधीरसिंह, प्रभुदयाल, मोनु राणा, सुंदरलाल, सोमनाथ, ओमप्रकाश आदि ने बताया कि सरकार ने क्षेत्र के लोगों की मांग पर गांव अंटावा में पंचायती भूमि पर 25 बेड का बड़ा सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र बनाया है। लेकिन अस्पताल बने महीनों हो चुके हैं। लेकिन अभी तक अस्पताल में कोई डॉक्टर तक की नियुक्ति नहीं की गई है। अस्पताल में मरीजों के इंलाज के लिए सरकार की ओर से सभी उपकरण उपलब्ध करवाए गए हैं। लेकिन कोई स्टाफ न होने के कारण सब बेकार पड़े हैं। लोग अस्पताल में इलाज करवाने पहुंचते है तो उन्हें अस्पताल में डॉक्टर व अन्य स्टाफ सदस्य न मिलने पर निराश होकर वापस जाना पड़ रहा है। स्वास्थ्य विभाग ग्रामीणों की समस्या को लेकर गंभीर नहीं है।
25 गांवों के लोग परेशान : ग्रामीणों का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग की ओर से करोड़ों रुपये खर्च करके बनाएं गए इस अस्पताल में आज तक न तो कोई डॉक्टर और न ही कोई स्टाफ सदस्य उपलब्ध करवाया गया है। जिससे आसपास के 20 से 25 गांवों के हजारों लोगों को अस्पताल में इलाज की सुविधा नहीं मिल पाई है। जिससे क्षेत्र के लोगों में सरकार व स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर भारी रोष है। मामले को लेकर कई बार गांव अंटावा की पंचायत प्रशासन के अधिकारियों से मिली। लेकिन फिर भी अस्पताल में कोई सुविधा उपलब्ध नहीं करवाई गई। अस्पताल में केवल एक चौकीदार तैनात है।
इस बारे सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र रादौर के एसएमओ डॉ. विजय परमार ने बताया कि सरकारी अस्पताल अंटावा के लिए विभाग की ओर से तीन डॉक्टरों के पद मंजूर किए गए हैं। डॉक्टर उपलब्ध हो गए हैं, लेकिन अभी स्टाफ उपलब्ध नहीं हुआ है। जिस कारण एक डॉक्टर को अभी सरकारी अस्पताल रादौर व दो अन्य डॉक्टरों को अस्थायी तौर पर ट्रामा सेंटर यमुनानगर में तैनात किया गया है। नए अस्पताल में स्टाफ उपलब्ध करवाने के प्रयास किए जा रहे हैं। जैसे ही स्टाफ उपलब्ध होगा तो अस्पताल शुरू कर दिया जाएगा।