संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। जैसे-जैसे मौसम में सुधार हो रहा, वैसे-वैसे प्लाईवुड उद्योग भी पटरी पर लौट रहा है। 1400 करोड़ रुपये की टर्न ओवर वाले प्लाईवुड उद्योग को इस बार काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा है। बारिश के कारण जो रॉ मटीरियल बाहर पड़ा होने के कारण वह भीग गया था, ऐसे में फैक्टरी के अंदर पक्का माल तैयार नहीं हो पाया।
कई बार श्रमिकों को भी फैक्टरी में खाली बैठना पड़ा। बारिश के कारण लगभग 30 से 40 प्रतिशत नुकसान होने की संभावना है। मौसम सुधार के बाद अब फैक्टरी में कार्य शुरू हो गया है। ऐसे में प्लाईवुड के काम ने तेजी पकड़ने लगा है। बता दें यमुनानगर में प्लाई की डिमांड निर्माण कार्य में वृद्धि, शटरिंग और मरीन प्लाई जैसे विशेष प्रकारों के उपयोग के कारण है, साथ ही पंजाब, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड जैसे पड़ोसी राज्यों से भी इसकी उच्च मांग है।
हरियाणा प्लाईवुड मैन्युफैक्चरिंग एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष जेके बिहानी का कहना है यमुनानगर का प्लाईवुड उद्योग को काफी नुकसान हो रहा है। बारिश के कारण माल भीग गया था, ऐसे में फैक्टरी के अंदर पक्का माल तैयार नहीं हो पाया था। इससे 30 से 40 प्रतिशत कारोबार पर असर पड़ा है। मौसम अब खुलने लगा है। इससे स्थिति में काफी सुधर हो चुका है।
100 उद्योग कर चुके पलायन
वैसे तो इसे प्लाईवुड हब कहा जाता है, लेकिन संकट के दौर से गुजरने पर करीब 100 उद्योग यहां से पलायन कर चुके हैं। जो बचे उद्योग चल रहे उनकी हालत भी ठीक नहीं है। हालांकि गुणवत्ता में यमुनानगर की प्लाईवुड ज्यादा बेहतर है। मंडियों में लकड़ी की आवक 60 प्रतिशत कम होने से उद्योग पर इसका असर पड़ रहा है। जिले में जगाधरी के मानकपुर और यमुनानगर के मंडौली में लकड़ी की मंडियां हैं। इन्हीं मंडियों से लकड़ी को प्लाईवुड फैक्ट्रियां में भेजा जाता है। प्लाईवुड उद्यमी अंकुर जैन ने बताया कि लकड़ी की जो ट्रॉली पहले 80 से 90 हजार रुपये की मिलती थी, अब वह करीब ढाई से पौने तीन लाख रुपये की पड़ती है। प्रदेश की 70 फीसदी प्लाईवुड फैक्टरियां यमुनानगर में हैं।