माह के दूसरे सप्ताह बादल महरबान हुए तो लोगों ने राहत की सांस ली। लेकिन पहाड़ी तलहटी में बसे गांवों में आफत आ गई। रविवार व सोमवार अल सुबह पहाड़ी व मैदानी क्षेत्र में जोरदार बारिश हुई। जिससे बरसाती नदियां उफान पर आ गई। पानी नदियों के किनारे तोड़ गांवों में घुस गया। जिससे दर्जनों गांवों की सैकड़ों एकड़ में लगा धान व गन्ना की फसल डूब गई। वहीं बारिश के कारण शहर की दर्जनों कॉलोनियों में भी जलभराव हुआ। जिससे लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। हालांकि बारिश से लोगों को चिपचिपी गर्मी से भारी राहत मिली, लेकिन बारिश के पानी के कारण शहर से ग्रामीण क्षेत्रों तक मुसिबत भी आ गई। जिले में औसतन 25 एमएम बारिश हुई। जबकि सबसे ज्यादा सरस्वतीनगर व बिलासपुर में हुई। सरस्वती नगर में 49 एमएम तो बिलासपुर में 35 एमएम बारिश हुई। साढ़ौरा में 14 और छछरौली में 24 एमएम बारिश दर्ज की गई। वहीं रादौर में 21 एमएम बारिश हुई। जबकि प्रतापनगर में सबसे कम तीन एमएम ही बारिश हुई। शहर की गलियां व सड़कें चार एमएम की बारिश में ही पानी से लबालब हो गईं।
पहाड़ी और मैदानी इलाकों में हुई मूसलाधार बरसात से छछरौली क्षेत्र के दर्जनों गांव की सैकड़ों एकड़ धान व गन्ना की फसल डूब गई। अत्याधिक पानी आने से फसल खराब हो गई। किसानों का कहना है कि सिंचाई विभाग की लापरवाही के कारण हर साल सोम नदी का पानी सैकड़ों एकड़ फसल बर्बाद कर देता है। किसानों की मांग है कि खराब फसलों की गिरदावरी कर किसानों को मुआवजा दिया जाए। किसान रविश, गगन, जसबीर, कर्मबीर, रिंकू, अकरम, पालाराम ने बताया कि लोप्पो, तिहानों, सलेमपुर गांवों के पास सोमनदी की पटरी की ऊंचाई बहुत कम है। जिस कारण हर साल सोम नदी में पानी आने पर गांव में बाढ़ आ जाती है। नदी के किनारे तोड़ पानी गांव का रूख कर लेता है। खेतों में पानी आने से फसल व किसान की मेहनत पानी में डूब जाती है।
सोम नदी का पानी फसल बर्बाद कर शेरपुर से डारपुर जाने वाली सड़क के साथ गांव को जोड़ने वाले लिंक रोड को भी हर साल क्षतिग्रस्त कर देता है। जिससे हर साल सरकार व किसानों का करोड़ों नुकसान होता है। उसके बावजूद भी प्रशासन इन गांवों में बाढ़ राहत बचाव कार्य कराने में असफल हो रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि खेतों व सड़कों पर आने वाले बाढ़ के पानी के रोकथाम के लिए कई बार जनप्रतिनिधियों से भी मिल चुके हैं। उसके बावजूद भी समस्या का समाधान नहीं हो रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि सिंचाई विभाग द्वारा तीनों गांवों के साथ लगती सोम नदी की पटरी को ऊंचा कर दिया जाए तो बाढ़ के पानी का रुख उनकी फसलों की ओर नहीं होगा।
रविवार व सोमवार तड़के पहाड़ों में हुई मूसलाधार बारिश से सोमनदी अचानक उफान पर आ गई। गांव मलिकपुर के समीप सोमनदी का पानी पुल को छूकर बहता दिखाई दिया। जिसे देखने के लिए सड़कों पर लोगों की भीड़ जमा हो गई। उफान आने पर सेामनदी किनारे बसे गांवों के किसानों को अपनी फसलों की चिंता सताने लगी। ग्रामीणों का कहना है कि घाड़ क्षेत्र में सोमनदी में नियमों को ताक पर रख कर की गई खुदाई से पानी का रास्ता बदल दिया है। जिस कारण पानी का रूख कभी भी गांव की तरफ हो सकता है। गांव भमनौली के समीप सोमनदी के दूसरी ओर किसानों ने खेतों के पास बनाई गई पटरी भी हो गई है। वहीं गांव मलिकपुर बांगर में गांव की ओर नदी के लगभग एक हजार फीट हिस्से का निर्माण न होने से पानी धान की फसल में घुस गया। ग्रामीण मनफूल सिंह के दो एकड़, अमर सिंह सैनी की दो एकड़, अमीर चंद, सप्पटर सिंह चार एकड़ भूमि नदी के पास लगती है। उन्हें बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। नंबरदार राहुल राणा ने बताया कि गांव की ओर लगभग पंद्रह सौ फीट में पटड़ी का निर्माण न होने से पंचायत की लगभग डेढ़ सौ एकड़ में खड़ी धान की फसल पानी की चपेट में आ गई है।
सोमनदी में अचानक आए उफान से रणजीतपुर मुख्य मार्ग पर बने पुल के किनारे क्षतिग्रस्त होने की आशंका बढ़ गई है। घाड़ क्षेत्र के इरफान, दलीप कुमार, राम कुमार का कहना है कि सेामनदी में उफान आने पर किसानों की चिंताएं बढ़ गई हैं। सोमनदी के किनारे स्थित गांव सुंदरपुर, गाढ़वाली, खानू वाला, मुजाफ्त, भमनौली, चिंतपुर, मलिकपुर बांगर सहित दर्जनों गांवों की कृषि योग्य भूमि में सोमनदी के पानी की आशंका बढ़ गई है और गांवों में बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है।