संवाद न्यूज एजेंसी
जगाधरी। जिले में सरकारी स्तर पर खेल कोचों की कमी के कारण खिलाड़ियों के प्रदर्शन पर असर पड़ रहा है। नौ से 11 फरवरी तक पलवल और गुरुग्राम में आयोजित मुख्यमंत्री कप में कोई भी खिलाड़ी पदक नहीं जीत सका। इस प्रतियोगिता के छह खेलों में 156 खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया था।
वहीं सरकारी स्तर पर कोचिंग न मिलने के कारण खिलाड़ियों को निजी खेल संस्थानों का रुख करना पड़ रहा है। निजी कोचिंग के लिए उन्हें जेब ढीली करनी पड़ रही है। इससे खिलाड़ियों को भारी परेशानी हो रही है। मुख्यमंत्री कप प्रतियोगिता में भी खिलाड़ी कोच के बिना ही अभ्यास कर मैदान में उतरे थे। इस कारण उनका प्रदर्शन बेहद खराब रहा।
कोचों की कमी के कारण खिलाड़ियों को निजी एकेडमी या दूसरे जिलों का रूख करना पड़ रहा है। अभी जिले में सरकारी स्तर पर कुश्ती, फुटबॉल, हॉकी, बैडमिंटन, कबड्डी, बॉक्सिंग, जूडो, भारोत्तोलन, खो-खो, तलवारबाजी व लॉन टेनिस के कोच हैं। इसके अलावा तेजली स्टेडियम में खेलो इंडिया का लघु शूटिंग केंद्र भी है, जहां शूटिंग की कोचिंग मिल रही है।
अन्य खेलों के लिए खिलाड़ी निजी खेल संस्थानों पर निर्भर हैं।सरकारी संस्थानों में विभाग की 25 खेल नर्सरियां हैं। इनमें एथलेटिक्स की आठ, हॉकी व फुटबॉल की पांच-पांच, रेस्लिंग की चार, वॉलीबॉल की दो और बॉक्सिंग, नेटबॉल, बास्केटबॉल, योगा, कबड्डी, कराटे की एक-एक खेल नर्सरी है। इन संस्थानों से दूर के खिलाड़ी यहां प्रशिक्षण लेने नहीं आ पाते हैं। ऐसे में कोच न होने से फायदा निजी संस्थानों को मिल रहा है।
शहर से लेकर गांवों में एक के बाद एक निजी खेल संस्थान फल-फूल रहे हैं। जिले में निजी खेल संस्थानों की संख्या करीब 60 हो गई है, जिनमें करीब तीन हजार खिलाड़ी प्रशिक्षण ले रहे हैं। ऐसे में कोचिंग महंगी होने के कारण आर्थिक कमजोर किशोर व युवा अभ्यास व खेलों से वंचित हो रहे हैं।
क्रिकेट और एथलेटिक्स के जल्द मिलें कोच
निजी खेल संस्थानों में प्रशिक्षण ले रहे खिलाड़ियों के अभिभावकों में विजय कॉलोनी के विकास जैन, यमुना विहार के राजकुमार, मुकेश सैनी ने बताया कि सरकारी स्तर पर कोच मिले तो खिलाड़ियों को मुफ्त कोचिंग मिल सकती है। परंतु कई वर्षों से तेजली स्टेडियम में क्रिकेट, एथलेटिक्स जैसे ज्यादा मांग वाले खेलों के कोच नहीं हैं। खेल कोचों के अभाव में खिलाड़ी सरकार से मिलने वाले निशुल्क प्रशिक्षण के साथ डाइट खर्च से वंचित हैं।
कोच की कमी से सभी को दिक्कत हो रही है। इसका असर खिलाड़ियों के प्रदर्शन पर पड़ रहा है। जिले में खेल कोचों की मांग के बारे में मुख्यालय को सूचित किया गया है। जल्द ही कई खेलों के नए कोच मिलने की उम्मीद है।
शिल्पा गुप्ता, जिला खेल अधिकारी, यमुनानगर।