संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। मंजूरी के एक साल बाद भी तेजली खेल परिसर में एथलेटिक्स के खिलाड़ियों को सिंथेटिक ट्रैक नहीं मिल पाया है। हालांकि मंजूरी के कुछ ही माह में सिंथेटिक ट्रैक के ड्राइंग व एस्टिमेट भी तैयार हो चुके थे, पर इसके आगे बजट व टेंडर अलॉट प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाई।
ये हालात तब हैं, जब यहां रोज अभ्यास के लिए करीब 350 खिलाड़ी आते हैं और उनमें कई तो राष्ट्रीय अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना चुके हैं। इनके प्रदर्शन को बेहतर बनाने के लिए नया अत्याधुनिक सिंथेटिक ट्रैक मिलना तो दूर पुराना एथलेटिक्स मैदान व ट्रैक भी खस्ता हाल हैं। जहां सतह उबड़-खाबड़ या उस पर आधे फीट तक घास है। ये स्थिति खिलाड़ियों के अभ्यास से लेकर प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने और बेहतर प्रदर्शन में रोड़ा अटकाती नजर आ रही हैं।
वर्ष-2021 में सिंथेटिक ट्रैक की मंजूरी के बाद खेल विभाग की ओर से इसकी तैयार ड्राइंग स्वीकृति के लिए पीडब्ल्यूडी के चीफ ऑर्कोलॉजिस्ट को भेजी गई थी। इस ड्राइंग में चार सौ मीटर का आठ लेन ट्रैक प्रस्तावित था। साथ ही इसमें लंबी कूद, हाई जंप, शॉटपुट, डिस्कस थ्रो, हैमर थ्रो आदि के मैदान के भी प्रस्ताव थे। इसके निर्माण पर 10.30 करोड़ बजट अनुमानित था।
जिले के कई खिलाड़ी यहां सिंथेटिक ट्रैक न होने से दूसरे जिलों में अभ्यास करने पर मजबूर हैं। क्योंकि खिलाड़ियों की मानें तो सिंथेटिक ट्रैक पर अभ्यास का अनुभव न होने पर राज्य, राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतियोगिता के समय बेहतर प्रदर्शन नहीं कर पाते हैं। क्योंकि बड़े स्तर की प्रतियोगिताएं सिंथेटिक ट्रैक पर ही होती हैं, इसलिए उनमें बेहतर प्रदर्शन के लिए जिला स्तर पर सिंथेटिक ट्रैक की सुविधा मिलनी जरूरी है।
तेजली खेल परिसर में अभी एथेलेटिक्स के मैदान व ट्रैक उबड़-खाबड़ व घास से अटे हैं। जिन पर दौड़ व अन्य खेलों के अभ्यास करते समय खिलाड़ियों को फिसलकर गिरने व चोटिल होने डर रहता है। इस तरह कई खिलाड़ी चोटिल भी हो चुके हैं। उनकी मानें तो यहां जिला व राज्य स्तर पर प्रतियोगिता के आयोजन के समय ही पूरे मैदान व ट्रैकी सफाई कराई जाती है अन्यथा इन हालात में खिलाड़ियों को अभ्यास करना पड़ता है।
सिंथेटिक ट्रैक के निर्माण को लेकर तमाम औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं। उम्मीद है कि जल्द यह सुविधा खिलाड़ियों को मिल जाएगी।
राजेंद्र पाल गुप्ता, जिला खेल अधिकारी, यमुनानगर।