संवाद न्यूज एजेंसी
जगाधरी। खंड छछरौली का गांव खारवन बंटवारे के बाद आए बदलाव का साक्षी है। आजादी से पहले मुस्लिम बहुल रहा गांव बंटवारे के बाद बिल्कुल ही बदल गया। इस दौरान पाकिस्तान से आए निर्वासितों की यह गांव शरण स्थली बना। गांव के आसपास हरियाली, खेती व पशुपालन का कारोबार पाकिस्तान से आए लोगों के लिए यह स्थान उत्तम रहा।
1947 में बंटवारे के समय भी पाकिस्तान में भी मूल आय के साधन कृषि व पशु पालन थे। जब निर्वासित पाकिस्तानी यहां बसे तो प्रशासन व सरकार का ध्यान गांव की ओर आकर्षित हुआ। प्रशासन ने गांव में लोगों को सुविधाएं मुहैया करवाने के लिए विभिन्न प्रबंध करने शुरू कर दिए। इसके बाद गांव में विकास होने लगा।
सुविधा मिलने के साथ यहां लोगों का बसने का सिलसिला शुरू रहा। यही नहीं उस समय पाकिस्तान आए काफी लोग कुछ दिन खारवन में शरण लेकर अन्य क्षेत्रों में विस्थापित हो गए। बावजूद इसके गांव में पाकिस्तान से आए पंजाबियों की तादाद 35 प्रतिशत से ज्यादा है। गांव की आबादी 11,000 के करीब है।
पूर्व सरपंच राजेंद्र कुमार ने बताया कि खारवन में कोई एतिहासिक किला, इमारत व भवन नहीं है। इसके साथ न ही गांव की पहचान किसी प्राचीन धरोहर से है। बावजूद इसके यह जिले के सबसे बड़े गांव में शामिल है। इसका रकबा 52,000 एकड़ में फैला है और इसमें कुल 22 वार्ड हैं। इसके अलावा गांव का आपसी सौहार्द जिले के लिए प्रेरणा का स्त्रोत है। गांव के अधिकांश लोग अपना कारोबार कर रहे हैं। शहर के किसी बड़े बाजार की तरह दुकानें हैं। इसके अलावा अब नई पीढ़ी के युवा नौकरी की ओर आकर्षित हो रहे हैं।
ग्रामीण आदर्श कुमार ने बताया कि खारवन को बड़ा गांव होने के साथ विकसित होने का भी दर्जा प्राप्त है। गांव की सभी गलियां व मुख्य मार्ग पक्के हैं। गांव में टाइल लगी हुई हैं और निकासी का भी प्रबंधन है। इसके अलावा पीने के पानी की भी समुचित व्यवस्था है। गांव में शहर की तरह सभी मूल सुविधाएं उपलब्ध हैं। गांव में वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय है। इससे गांव की साक्षरता दर बढ़कर 72 प्रतिशत हो गई है। ग्रामीण ने बताया कि गांव के लोगों की आय का मुख्य साधन खेती और नौकरी है।
खारवन के निवासी विकास सैनी ने बताया कि गांव का विकास और यहां उपलब्ध मूलभूत सुविधाएं युवाओं के लिए प्रेरणादायक हैं। पहले जहां लोगों का मुख्य सहारा खेती था, वहीं अब नई पीढ़ी शिक्षा और रोजगार के नए अवसरों की ओर बढ़ रही है। गांव में बेहतर सड़कें, शिक्षा और अन्य सुविधाएं होने से युवाओं को अपने भविष्य के लिए बाहर जाने की मजबूरी कम हुई है।
खारवन निवासी राहुल सिंगला ने बताया कि गांव सबसे बड़ी ताकत यहां का आपसी भाईचारा, प्रेम व सहयोग है। यही कारण है कि अन्यों की अपेक्षा गांव का विकास ज्यादा हुआ है। हमारे बुजुर्गों ने गांव को आगे बढ़ाने के लिए जो नींव रखी, उसी का परिणाम है कि आज यहां शहर की तरह सुविधाएं उपलब्ध हैं। अब हम सभी का दायित्व बनता है कि हम इसे संजोय और इसे आगे बढ़ाए।
पूर्व सरपंच राजेंद्र कुमार।
पूर्व सरपंच राजेंद्र कुमार।