संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। नगर निगम अफसरों का जोर केवल निर्माण कार्यों का श्रीगणेश कराने पर है, पर शुरू होने के बाद काम चल भी रहे हैं या नहीं, इस पर कोई गौर नहीं कर रहा। ऐसा ही कुछ शहर में चल रहे सड़क-नालों के निर्माण कार्य बयान कर रहे हैं। जिन्हें शुरू करने में तेजी दिखाई गई, पर कई दिन ठेकेदार काम रोक रहे हैं।
इससे उखाड़ी गई सड़कों व नाले-नालियों से मानसून सीजन में लोगों के लिए जल निकासी व आवागमन में परेशानी हो रही है। निवर्तमान पार्षदाें में रामआसरा भारद्वाज, विनोद मरवाह ने आरोप लगाया कि ठेकेदारों पर अफसर मेहरबान हैं, जो रुके काम देखकर भी संबंधित ठेकेदारों पर कार्रवाई नहीं कर रहे।
शहीद भगत सिंह चौक से गुरुनानक खालसा कॉलेज तक 50 लाख रुपये में सीसी सड़क बननी है। ये काम सालभर कागजों में रहा, जो गत दो जुलाई को शुरू हुआ। तीन दिन मार्ग के एक ओर पुरानी नालियां व सड़क उखाड़ कर पाइप बिछाए। दुकानदारों की मानें तो गत सात दिन से काम नहीं लगा। राजकुमार, संजय ने कहा कि रोड पर कॉलेज, दो स्कूल व कई इंस्टीट्यूट व सैकड़ों दुकानें हैं। न्यू हमीदा, भाटिया नगर व अन्य कई कॉलोनियों के लोग भी यहां से निकलते हैं। आधी सड़क तक मलबा व निर्माण सामग्री होने से जाम की स्थिति से परेशान हैं। पार्षद प्रतिनिधि पवन बिट्टू ने कहा कि मलबा उठान व निर्माण सोमवार को लगेगा।
ओपी जिंदल पार्क से गोल्डनपुरी तक पुराने तंग नाले को तोड़ बड़े आकार का नाला बन रहा है। इसके लिए पहले साथ से सड़क उखाड़ी गई, जिसके बीच से पुराने नाले का पानी निकाला गया। लेकिन माहभर से उखाड़ी सड़क के मलबे का उठान नहीं हुआ, जो आधे मार्ग तक फैला है। दुकानदार लवली व निवासी विकास, मन्नू ने कहा कि मलबे से ट्रैफिक जाम हो रहा है और हादसे का डर है। आसपास स्ट्रीट लाइट न होने से रात के अंधेरे में मलबा नहीं दिखता। बारिश होने पर जलभराव व कीचड़ हो जाता है। निवर्तमान पार्षद सुरेंद्र शर्मा ने कहा कि निगम अफसरों से कहकर मलबे का उठान और नाले का निर्माण जल्द पूरा कराएंगे।
वार्ड-15 की विजय कॉलोनी में नगर निगम की ओर से करीब एक माह पहले नालियों बनाने का काम शुरू किया गया। इसके लिए पुरानी नालियां उखाड़ी गई। इसके बाद कई दिनों तक निर्माण कार्य के लिए लेबर नहीं आई। निवासियों ने नगर निगम एक्सईन विकास धीमान को मानसून बाद ही यह काम लगाने की मांग में पत्र सौंपा। कॉलोनी के विकास जैन ने बताया कि कॉलोनी शहर के निचले इलाकों में से हैं, जहां मानसून में दो तीन फीट जलभराव होता है। निगम को नालियां मानसून से पहले बनानी चाहिए थी।
निर्माण कार्यों पर शुरू कराने से लेकर पूरे होने तक संबंधित अफसरों के निगरानी रहती है। कहीं काम में देरी या मलबा उठान नहीं हो रहा तो इस बारे में दिशा-निर्देश देंगे। - आयुष सिन्हा, आयुक्त, नगर निगम।