यमुनानगर। आयुष्मान योजना के तहत आयुष्मान पैनल से जुड़े 37 निजी अस्पतालों में इलाज लेने वाले लोगों को एक जुलाई से योजना के तहत उपचार नहीं मिलेगा। ये ऐलान आईएमए (इंडियन मेडिकल एसोसिएशन) ने किया है। योजना के अनुसार जिले के 37 निजी अस्पतालों का करीब 20 करोड़ रुपये सरकार पर लंबित भुगतान है। भुगतान नहीं मिलने पर निजी अस्पतालों नेउपचार न देने के लिए निर्णय लिया है। इन अस्पतालों से जिले के लगभग 50 हजार लोग जुड़े हैं।
वहीं आईएमए के राज्य सचिव डॉ. डीके सोनी ने बताया कि प्रदेश की बात करें तो 550 निजी अस्पतालों का करीब 300 करोड़ रुपये का भुगतान लंबित है। अस्पतालों का लंबित भुगतान न होने पर निजी अस्पताल आयुष्मान पैनल के तहत उपचार नहीं देने को मजबूर हैं। इससे पहले भी कई बार सरकार द्वारा लंबित भुगतान रखा गया। ऐसे में अस्पताल अपने खर्च कैसे पूरे करेंगे। उन्होंने बताया कि आयुष्मान योजना के तहत कैंसर, हार्ट अटैक जैसी गंभीर बीमारियों के साथ 2200 के करीब दूसरी बीमारियों का सालाना पांच लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज किया जाता है। सरकार के पैनल में शामिल निजी अस्पतालों में मरीज इलाज तो ले रहे थे लेकिन इसके बदले में लंबे समय से सरकार की तरफ से निजी अस्पतालों को भुगतान नहीं किया जा रहा था। भुगतान रुकने के अलावा निजी अस्पतालों में आयुष्मान भारत योजना के तहत इलाज के नए मूल्य लागू नहीं होने से भी नाराजगी थी।
ये हैं निजी अस्पतालों की मुख्य मांगें-
- समय पर भुगतान हो और एमओयू की शर्तों के अनुसार जारी किया जाए।
- देरी होने पर एक फीसदी दंडात्मक ब्याज दिया जाए।
- पूर्व-स्वीकृति के बाद कटौती और अस्वीकृतियों को रोका जाए।
- हरियाणा में एचबीपी-2022 पैकेजों का कार्यान्वयन शीघ्र किया जाए।
- टीएमएस-2 पोर्टल में तकनीकी समस्याओं का समाधान हो।
- दस्तावेजीकरण आवश्यकताओं को सरल बनाया जाए ताकि वे बाधा न बनें।
- जुर्माना लगाने की नीतियों को और तार्किक बनाया जाए।
- जांच अधिकारियों और कर्मचारियों द्वारा उत्पीड़न रोका जाए।