यमुनानगर शहर की तीन अनाज मंडियों में बुधवार को धान की खरीद शुरू हो गई। बुधवार को जिन-जिन मंडियों में जिला खाद्य एवं आपूर्ति विभाग (डीएफएससी) को खरीद करनी थी, केवल वहीं खरीद हो पाई।
इनमें जगाधरी, छछरौली और मुस्तफाबाद अनाज मंडी शामिल हैं। वहीं खरीद शुरू होने का कराण राइस मिलर्स एसोसिएशन का दो फाड़ होना बताया जा रहा है।
सूत्रों के मुताबिक जिले के दस प्रतिशत राइस मिलर्स ने डीएफएससी के साथ एग्रीमेंट कर लिया है। जिसके बाद डीएफएससी की ओर से उन दस प्रतिशत राइस मिलर्स के सहारे मंडियों में खरीद शुरू कर दी है।
बताया यह भी जा रहा है कि दस प्रतिशत राइस मिलर्स का केवल डीएफएससी से ही एग्रीमेंट हुआ है। हैफेड के साथ ये भी एग्रीमेंट करने के लिए तैयार नहीं है। गौरतलब है कि मंडियों में धान की सरकारी खरीद एक अक्तूबर से शुरू हुई है।
बुधवार को 7805 क्विंटल धान की खरीद
बुधवार को जगाधरी अनाज मंडी में सुबह और शाम को खरीद टीम की ओर से धान की खरीद की गई। इसमें कुल 7805 क्विंटल धान की खरीद हुई। अब वीरवार को खरीद हैफेड को करनी है, लेकिन ऐसा माना जा रहा है कि मिलर्स का हैफेड के साथ एग्रीमेंट न होने से खरीद होना मुश्किल है।
कुछ मंडियों में सातों दिन खरीद करती है हैफेड
कुछ मंडियां ऐसी हैं जिनमें हैफेड और अन्य एजेंसी को तीन-तीन दिन खरीद करनी है। वहीं कुछ में हैफेड सप्ताह के सातों दिन खरीद करती है। हैफेड की खरीद सातों दिन रादौर मंडी, छछरौली, जठलाना, गुमथला, जगाधरी, खिजराबाद और खारवान में होगी। वहीं, जगाधरी, छछरौली और मुस्तफाबाद में डीएफएससी को खरीद सप्ताह में तीन दिन खरीद करनी है। राइस मिलर्स हैफेड से ज्यादा खफा हैं। मिलर्स एसोसिएशन के पदाधिकारियों का कहना है कि हैफेड अधिकारियों ने उन्हें परेशान किया है। जब तक मांगें नहीं मानी जाती हैं तब तक हैफेड के साथ किसी भी सूरत में एग्रीमेंट नहीं होगा।
‘कुछ मिलर्स ने कराया एग्रीमेंट’
हरियाणा राइस मिल एंड डीलर एसोसिएशन के प्रधान आरएस गग ने बताया कि कुछ मिलर्स की ओर से एग्रीमेंट किया गया है। वे अन्य गुट के हैं। हमारी तरफ से तब तक एग्रीमेंट नहीं किया जाएगा, जब तक मांगे नहीं मानी जाती। उनका कहना है कि ऐसे दस प्रतिशत ही मिलर्स हैं जिनकी ओर से एग्रीमेंट किया गया है।
लड़ाई एजेंसी और मिलर्स में, घाटा किसान को
खरीद एजेंसियों और राइस मिलर्स के बीच चल रहे विवाद का खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ रहा है। बुधवार को जिले की तीन मंडियों में ही धान की खरीद तो हुई लेकिन किसानों को सरकार के तय रेट या उससे से कम में ही फसल बेचनी पड़ी। किसानों को मंडी में फसल की रखवाली खुद ही करनी पड़ रही है। जिन मंडियों में धान की खरीद शुरू नहीं हो पाई, वहां सीधा घाटा किसान को उठाना पड़ रहा है, क्योंकि किसान धान को घर ले जा नहीं सकता है उसे फसल को सीधा मंडी लाना पड़ता है।
जल्द एग्रीमेंट नहीं हुआ तो और होगी दिक्कत
राइस मिलरों और खरीद एजेंसियों के बीच चल रहा मामला अगर जल्द ही नहीं सुलझा तो किसानों की दिक्कतें बढ़ सकती हैं। फसल कम रेट में बेचने से जहां किसान घाटा होगा, वहीं, जिस तेजी से 90 राइस मिलर उठान करते हैं, उस तेजी से दस मिलर कैसे धान उठाएंगे। मंडी में खरीद फसल के उठान में दिक्कत आने से और आवक बढ़ने से किसानों को मंडी में धान रखने में दिक्कत होगी।
दूसरे दिन ही मंडी के फड़ हुए फुल
बुधवार को सरकारी खरीद का दूसरा दिन था, लेकिन जगाधरी अनाज मंडी प्रशासन के इंतजाम अधूरे नजर आए। सभी फड़ों पर फसल पड़ी थी। किसानों को फसल डालने की जगह नहीं मिली। इससे मजबूरन किसानों को सड़क पर ही फसल डालनी पड़ी। जिस सड़क पर किसान की फसल डाली गई थी, वह उस सड़क पर मिट्टी और बजरी पड़ी थी। लेकिन किसान को मजबूरी में सड़क पर ही फसल डालनी पड़ी।
गांव औदरी के किसान प्रवीन कुमार, बहरामपुर के किसान सुरेंद्र सिंह, गुगलों के किसान बुद्ध राम और सुरेश ने बताया कि जिस फसल की मंडी में बेकद्री हुई है उसे उन्होंने छह महीने दिन रात एक कर तैयार किया है। फसल को सुखाने के लिए इधर-उधर डाला जा रहा है।