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Yamuna Nagar News: पौष प्रदोष कल, पूजन से दूर होंगी जीवन की बाधाएं

Tue, 16 Dec 2025 01:29 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
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भाटली के स्वयंभू ​शिव मंदिर का ​​शिवलिंग। आर्काइव
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संवाद न्यूज एजेंसी
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जगाधरी। पौष माह का पहला और इस साल का अंतिम प्रदोष व्रत 17 दिसंबर को किया जाएगा। यह तिथि न केवल धार्मिक बल्कि ज्योतिष दृष्टि से भी महत्वपूर्ण रहेगी। प्रदोष से एक दिन पहले यानी 16 दिसंबर को सूर्य देव धनु राशि में प्रवेश करेंगे। यहां पहले से ही ग्रहों के सेनापति मंगल मौजूद हैं। इससे सूर्य-मंगल की युति का शुभ प्रभाव यह उपवास करने वाले पड़ेगा।

ज्योतिषाचार्य पंडित महेश शांडिल्य ने बताया कि प्रदोष, भगवान शिव को समर्पित व्रत है, जिसे हर माह के शुक्ल व कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर किया जाता है। पौराणिक मान्यता है कि, इस दिन महादेव की आराधना करने से साधक की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। भगवान शिव की पूजा करने से जीवन में सौभाग्य, शांति तथा समृद्धि का वास होता है।
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इसके अलावा प्रदोष पर शिवलिंग पर जल, दूध, गंगाजल, बेलपत्र, पुष्प अर्पित करने से व्यक्ति के समस्त पाप नष्ट होते हैं और देवों के देव महादेव प्रसन्न होकर कृपा बरसाते हैं। शास्त्रों में प्रदोष व्रत को शिव-पार्वती की कृपा का सर्वोत्तम माध्यम माना गया है। यह व्रत श्रद्धा व विश्वास से करने से जीवन में आध्यात्मिक उन्नति व मानसिक शांति स्थापित होती है।



पंडित रमन वत्स ने बताया कि पंचांग के अनुसार 16 दिसंबर की रात 11 बजकर 57 मिनट पर त्रयोदशी तिथि प्रारंभ होगी। वहीं, त्रयोदशी का समापन 18 दिसंबर मध्य रात्रि दो बजकर 32 मिनट पर होगा। ऐसे में उदया तिथि के अनुसार प्रदोष व्रत 17 दिसंबर को किया जाएगा। उन्होंने बताया कि प्रदोष व्रत बुधवार को पड़ रहा है। बुधवार होने से इसका महत्व बढ़ जाता है। उन्होंने बताया कि इस दिन शिव परिवार की पूजा अत्यंत लाभकारी होती है।



उन्होंने बताया कि बुधवार को शाम छह बजकर चार मिनट से रात आठ बजकर 41 मिनट तक प्रदोष काल रहेगा। इस प्रदोष अवधि में महादेव की पूजा कर सकते हैं। इसके अलावा शाम पांच बजकर 11 मिनट से 18 दिसंबर की सुबह सात बजकर आठ मिनट तक सर्वार्थ सिद्धि योग रहेगा। इस दौरान अमृत सिद्धि योग भी बन रहा है। इससे काल में पूजन करने से शुभ फल प्राप्त होगा।
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इस तरह करें पूजा



पंडित ललित शर्मा ने बताया कि प्रदोष व्रत के दिन घर में एक साफ चौकी पर लाल रंग का कपड़ा बिछाएं। इस पर भगवान शिव परिवार की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें। शिव परिवार को वस्त्र पहनाएं और सभी को फूल अर्पित करें। शिवलिंग पर कच्चा दूध, गंगाजल और शुद्ध जल से अभिषेक करें। मां पार्वती को शृंगार का सामान अर्पित करें, वहीं महादेव को बेलपत्र चढ़ाएं। घी का दीपक जलाकर भगवान शिव और मां पार्वती की आरती करें। इस दौरान सफेद मिठाई का भोग शिव परिवार को लगाएं और पूजा के बाद प्रसाद वितरित करें। इस दिन जरूरतमंदों को वस्त्रों का दान करना अत्यंत शुभ होता है।
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